MMDR Amendment Bill 2026: खनन से राज्यों की कमाई पर नहीं पड़ेगा असर, हर 1 रुपये में मिलेंगे 90 पैसे
MMDR Amendment Bill 2026 का उद्देश्य प्रमुख खनिज क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता लाना है, जिससे राज्यों की खनन आय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

MMDR Amendment Bill, 2026 का झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कर रहे विरोध। (एआइ फोटो)
HighLights
MMDR संशोधन विधेयक 2026 संसद में पारित, स्थिरता का लक्ष्य।
राज्यों को खनन राजस्व का 90% मिलता रहेगा, कोई बदलाव नहीं।
निवेश बढ़ेगा, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 को बल।
मृत्युंजय पाठक, धनबाद। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR Amendment Bill, 2026) लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चेतावनी दी है। सत्ताधारी झामुमो के अध्यक्ष सोरेन ने कहा है कि केंद्र सरकार के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि संशोधित कानून के लागू होने के बाद राज्य का राजस्व कम हो जाएगा। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का संचालन मुश्किल हो जाएगा। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ किया है कि नए कानून के लागू होने के बाद भी खनन से होने वाली आय में राज्यों की हिस्सेदारी पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
केंद्र सरकार और खान मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खनन से जुड़े कुल राजस्व का करीब 90 प्रतिशत राज्यों को ही मिलता रहेगा। यानी हर एक रुपये की खनन आय में से लगभग 90 पैसे राज्यों के हिस्से में जाएंगे। सरकार का कहना है कि संशोधन से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और राजस्व संग्रह पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
संसद में मानसून सत्र में पास हुआ विधेयक
खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों ने 13 अगस्त, 2026 को पारित कर दिया। यह विधेयक खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR अधिनियम) में संशोधन करता है, जिसका उद्देश्य प्रमुख खनिज क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता लाना है।
केंद्रीय खान मंत्रालय ने जारी बयान में कहा है-संशोधन विधेयक राज्यों के भूमि और खनिजों से संबंधित किसी भी अधिकार या राज्यों द्वारा एकत्र किए जाने वाले खनिजों पर किसी भी कर को समाप्त नहीं करेगा।
वर्तमान में, खनन में कुल करों और वैधानिक भुगतानों में से लगभग 90% राज्यों को प्राप्त होता है और संशोधन के बाद भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। इसके अलावा, यह संशोधन राज्यों की लघु खनिजों को विनियमित करने और उन पर कर लगाने की शक्ति को प्रभावित नहीं करेगा।
उपरोक्त संशोधनों का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में राजकोषीय व्यवस्था में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमेयता प्रदान करना है, जिससे खनन में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और अंततः विकसित भारत 2047 के विजन को प्राप्त करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
खनिज अवसंरचना, विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और समग्र आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 10,12,529 करोड़ रुपये मूल्य के खनिजों का आयात किया।
करों का असंतुलित तरीके से अत्यधिक लगाया जाना उद्योग को आयातित खनिजों पर निर्भर होने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा।
खनन कार्यों पर राज्य वसूलते हैं 14 प्रकार के कर
वर्तमान में राज्य खनन कार्यों पर लगभग 14 प्रकार के कर, शुल्क, फीस और अन्य उपकर लगा रहे हैं, जैसे रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डेड रेंट, जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) में योगदान, वस्तु एवं सेवा कर (GST), ट्रांजिट शुल्क आदि।
90 प्रतिशत राजस्व राज्यों को
कुल खनन राजस्व का लगभग 90% राज्यों को प्राप्त होता है। वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2025-26 तक प्रमुख खनन राज्यों को कुल 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए हैं, जबकि इसी अवधि में केंद्र को प्राप्त राजस्व केवल 82,000 करोड़ रुपये था।
खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR संशोधन विधेयक, 2026) के बाद भी यह स्थिति समान बनी रहेगी।
2015 में नीलामी व्यवस्था लागू होने के बाद, राज्यों को राजस्व का एक और प्रमुख स्रोत नीलामी प्रीमियम के रूप में प्राप्त हुआ है-यह वह राशि है जिसे नीलामी में सफल बोलीदाता द्वारा उद्धृत किया जाता है।
छह साल में राज्यों को मिले 96 हजार करोड़ रुपये
2020-21 से 2025-26 के दौरान प्रमुख खनन राज्यों ने 96 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नीलामी प्रीमियम एकत्र किया है, जो रॉयल्टी, DMF, GST आदि जैसे अन्य राजस्व स्रोतों के अतिरिक्त है। इस प्रकार, जिन राज्यों ने नीलामी और नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों को परिचालन में लाने में अग्रणी भूमिका निभाई है, उनके राजस्व में तेजी से वृद्धि देखी गई है।
प्रबंधन के लिए सुसंगत रणनीति आवश्यक
खान मंत्रालय का कहना है कि खनिज संसाधन सीमित हैं और भौगोलिक रूप से केवल कुछ राज्यों में केंद्रित हैं, इसलिए उनके प्रबंधन के लिए एक सुसंगत राष्ट्रीय रणनीति की आवश्यकता है, ताकि सतत, समान और एकरूप आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जा सके
राज्य स्तर पर कराधान में अनियंत्रित क्षेत्रीय असमानताएं घरेलू लागत बढ़ाकर इस व्यवस्था को बाधित करती हैं। अनियंत्रित और असमान राज्य स्तरीय शुल्क घरेलू खनिजों को अप्रतिस्पर्धी बनाकर, प्रचुर स्थानीय भंडार उपलब्ध होने के बावजूद अनावश्यक विदेशी आयात को प्रोत्साहित करके और राष्ट्रीय बाजार को खंडित करके जनहित को कमजोर करते हैं।
𝐓𝐚𝐱𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 का 𝐑𝐞𝐠𝐮𝐥𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧, 𝐋𝐚𝐧𝐝 𝐑𝐢𝐠𝐡𝐭𝐬 का नहीं
— Coal India Limited (@CoalIndiaHQ) August 16, 2026
MMDR Amendment Bill 2026 खनिज-युक्त भूमि पर कराधान (Taxation) से संबंधित है - भूमि अधिकारों (Land Rights) से नहीं। राज्यों द्वारा पहले से लागू 14 से अधिक लेवी/उपकरों के बीच यह आवश्यक स्पष्टता और एकरूपता लाता… pic.twitter.com/utx8USO3e0
राज्यों का हिस्सा ~𝟗𝟎% बरकरार
— Coal India Limited (@CoalIndiaHQ) August 16, 2026
MMDR Amendment Bill 2026 से पहले और बाद में भी, खनन क्षेत्र से प्राप्त राजस्व में राज्यों का हिस्सा ~90% पर कायम। न कोई कमी, न कोई कटौती, न कोई अप्रत्याशित बदलाव। जिम्मेदारी के साथ सुधार।
States' share stays at ~90%
Before the MMDR Amendment… pic.twitter.com/j3G8yNxr4E
