मुंहबोली बहन की मौत ने बना दिया लेखक, अब चर्चा में है 'नेहा दीदी का लाडला'
Neha Didi Ka Ladla धनबाद के राजगंज के शुभम कुमार रवानी ने अपनी मुंहबोली बहन की याद में "नेहा दीदी का लाडला" पुस्तक लिखी, जिसकी 25 हजार से अधिक प्रतिया ...और पढ़ें

नेहा दीदी का लाडला और रिश्तों की जिम्मेदारियां पुस्तक का कवर पेज।
HighLights
मुंहबोली बहन की याद में लिखी पहली पुस्तक।
"नेहा दीदी का लाडला" की 25 हजार से अधिक प्रतियां बिकीं।
अब मध्यमवर्गीय परिवार के संघर्ष पर उपन्यास लिखेंगे।
शुभंकर, राजगंज (धनबाद)। झारखंड के धनबाद जिले के राजगंज के एक साधारण परिवार से आने वाले युवा शुभम कुमार रवानी ने अपनी मुंहबोली बहन की यादों को शब्दों में ऐसा पिरोया कि उनकी लिखी किताब हजारों पाठकों के दिल तक पहुंच गई।

एक सड़क हादसे में मुंहबोली बहन को खोने का दर्द ही उनके लेखन की प्रेरणा बना और आज उनकी दो पुस्तकों की 25 हजार से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। अब वह मध्यमवर्गीय परिवार के संघर्ष और सफलता की कहानी पर आधारित एक उपन्यास लिखने की तैयारी में जुटे हैं।
मुंहबोली बहन की प्रेरणा से लिखी किताब
दो भाइयों में शुभम बड़े हैं। उनकी कोई सगी बहन नहीं है। उन्होंने एक मुंहबोली बहन बनाई थी, लेकिन यह रिश्ता अधिक दिनों तक नहीं चल सका। एक सड़क हादसे में उनकी बहन का निधन हो गया। इसके बाद शुभम ने उनकी प्रेरणा से यह पुस्तक लिखी।
23 वर्षीय शुभम ने बताया कि राजगंज स्थित बड्स गार्डेन स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने विज्ञान संकाय में कतरास कॉलेज में नामांकन लिया। ट्यूशन पढ़ने के दौरान उनकी मुलाकात कतरास निवासी नेहा से हुई। इसके बाद वह उन्हें दीदी कहकर पुकारने लगे और दोनों के बीच भाई-बहन का अटूट रिश्ता बन गया।
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वर्ष 2020 में एक सड़क दुर्घटना में नेहा की मौत हो गई। इस गम से उबरने के बाद शुभम ने उनकी स्मृति में नेहा दीदी का लाडला नमक पुस्तक लिखी। इसका प्रकाशन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित एवेंसीपब पब्लिकेशन द्वारा किया गया।
पहली किताब की सफलता के बाद लिखी दूसरी पुस्तक
पहली पुस्तक की सफलता के बाद शुभम ने रिश्तों की जिम्मेदारियां नामक दूसरी पुस्तक लिखी। इसमें दो अलग-अलग परिवारों, दुकानदार और किराएदार, जूनियर और सीनियर विद्यार्थियों सहित विभिन्न रिश्तों के स्वरूप और उनकी जिम्मेदारियों को दर्शाया गया है।
उन्होंने बताया कि दुकानदार और किराएदार के संबंधों का चित्रण राजगंज स्थित रवि मेडिकल के संचालक दुलाल गोप से प्रेरित है। इस पुस्तक के माध्यम से विभिन्न प्रकार के रिश्तों की वास्तविकता को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जिसे पाठक रुचि लेकर पढ़ रहे हैं।
शुभम के अनुसार, उनकी दोनों पुस्तकों की लगभग 25 हजार प्रतियां ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक चुकी हैं। इसके अलावा शैक्षणिक एवं सामाजिक मेलों में स्टॉल लगाकर भी पुस्तकों की बिक्री की जा रही है।
अब उपन्यास लिखने की तैयारी
दो पुस्तकों की सफलता के बाद शुभम का उत्साह बढ़ गया है। अब वह एक उपन्यास लिखने की तैयारी में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि यह भी सत्य घटना पर आधारित होगा, हालांकि इसमें कुछ काल्पनिक अंश भी जोड़े जाएंगे। उपन्यास में एक मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उसकी सफलता तक की कहानी होगी। इसमें यह दर्शाया जाएगा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए बच्चों को किन-किन कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है।
पिता हैं दर्जी
शुभम के पिता प्रह्लाद रवानी दर्जी का काम करते हैं। उनका छोटा भाई पढ़ाई कर रहा है। मां शर्मिला देवी गृहस्थी संभालने के साथ-साथ दुकान पर जाकर सिलाई कार्य में भी सहयोग करती हैं।
शुभम ने इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पीके राय मेमोरियल कॉलेज से अर्थशास्त्र विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने इसी विषय में स्नातकोत्तर (पीजी) की डिग्री प्राप्त की। फिलहाल वह डोमनपुर में एनडीकेएल नामक अपनी एजुकेशन कंसल्टेंसी संचालित कर रहे हैं।