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    गोमो स्टेशन: जहां से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने शुरू की थी अपनी साहसिक यात्रा

    By Manoj Kumar Swankar Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Fri, 16 Jan 2026 04:54 PM (IST)

    गोमो रेलवे स्टेशन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण अध्याय का साक्षी है। 18 जनवरी 1941 की आधी रात को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने यहीं से अंग्र ...और पढ़ें

    गोमो स्टेशन पर लगी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा।

    गोमो स्टेशन पर लगी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा।

    मनोज स्वर्णकार, जागरण, गोमो (धनबाद)। हरा-भरा पहाड़ियों के बीच बसा गोमो रेलवे स्टेशन केवल एक रेल जंक्शन नहीं बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे रहस्यमय और साहसिक अध्याय का साक्षी है। इसी स्टेशन से 18 जनवरी 1941 की आधी रात नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजी हुकूमत को चकमा देकर कालका मेल पकड़कर देश से बाहर निकलने की ऐतिहासिक यात्रा शुरू की थी।

    नेताजी उस रात प्लेटफार्म संख्या दो-एक से हावड़ा–कालका मेल (वर्तमान नेताजी एक्सप्रेस) में सवार होकर पेशावर के लिए रवाना हुए थे। इस घटना को 85 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है लेकिन नेताजी के अंतिम ठिकाने को लेकर रहस्य आज भी बरकरार है। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में गोमो रेल नगरी में हर वर्ष 18 जनवरी को महा निष्क्रमण दिवस मनाया जाता है।

    आस्ट्रेलियन कार से गोमो पहुंचे थे नेताजी 
    नेताजी 17 जनवरी 1941 की रात अपनी पत्नी भतीजे शिशिर बोस और अशोक बोस के साथ आस्ट्रेलियन कार (संख्या बीएलए -7169) से तोपचांची मार्ग होते हुए गोमो पहुंचे थे। यहां से वे पेशावर के रास्ते रेंगुनी पहुंचे और फिर गुमनामी के अंधेरे में विलीन हो गए। नेताजी की यह पूरी योजना अत्यंत गोपनीय रखी गई थी। उनकी कार यात्रा का उल्लेख प्रसिद्ध बंगला पुस्तक ‘आमी बोलछी’ में भी मिलता है।

    गोमो के लोको बाजार से भी जुड़ा है नेताजी का किस्सा
    नेताजी की गोमो यात्रा की एक अहम कड़ी लोको बाजार स्थित अब्दुल्ला हाता से भी जुड़ी है। अधिवक्ता एसएम फकरुल्लाह (64) जो शेख अब्दुल्ला के पोते हैं। वे बताते हैं कि उनके दादा के अनुसार नेताजी काबुली वेश में देर शाम अपने भतीजे के साथ उनके घर आए थे। कुछ समय ठहरने के बाद नेताजी ने गोमो स्टेशन जाने की इच्छा जताई और इसे पूरी तरह गोपनीय रखने की शर्त रखी गई। बाद में किरायेदार अमीन दर्जी के साथ उन्हें स्टेशन भेजा गया। जिन्होंने कालका मेल का टिकट कटवाया था।

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    18 जनवरी गोमो के लिए ऐतिहासिक दिन
    गोमो में हर वर्ष महा निष्क्रमण दिवस श्रद्धा और गर्व के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष इसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की तैयारी है। रेलवे एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    गोमो स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो-एक के बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आदमकद प्रतिमा स्थापित है। जहां रविवार को रेलवे राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा माल्यार्पण किया जाएगा, हालांकि प्रतिमा स्थल का सौंदर्यीकरण अब भी प्रतीक्षा में है।

    नेताजी के नाम से जाना जाता है गोमो स्टेशन
    गोमो रेलवे स्टेशन का नाम वर्ष 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन (गोमोह) रखा गया। हर वर्ष निष्क्रमण की रात हावड़ा–कालका नेताजी एक्सप्रेस का गोमो में समाज सेवियों द्वारा फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया जाता है