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    दुमका में ममता शर्मसार! जंगल में फेंका नवजात, रोने की आवाज सुन निसंतान दंपती ने बचाई जान

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 01:35 AM (IST)

    दुमका के जामा थाना क्षेत्र में एक नवजात शिशु को जंगल में फेंक दिया गया, जिसे हल्दीपट्टी गांव की रंजू देवी और स्थानीय युवकों ने रोते हुए पाया। ...और पढ़ें

    जंगल में फेंका नवजात

    जंगल में फेंका नवजात

    HighLights

    1. दुमका के जंगल में नवजात शिशु को फेंका गया।

    2. रोते हुए बच्चे को निसंतान दंपती ने बचाया, गोद लेने की इच्छा।

    3. पुलिस मामले की जांच कर रही, बच्चे का इलाज जारी।

    संवाद सूत्र, चिकनियां (दुमका)। नौ माह के कोख में रखने के बाद एक मां ने अपने नवजात शिशु को जंगल में फेंक कर मां की ममता को शर्मसार कर दिया। मंगलवार की सुबह जामा थाना क्षेत्र के तपसी पंचायत के कामुडुमरिया जंगल के समीप सड़क किनारे शिशु को लावारिस हालत में रोता देख हल्दीपट्टी गांव की रंजू देवी व स्थानीय युवकों ने उसे उठा लिया। 

    नवजात शिशु झोले में रखा हुआ था। रंजू देवी ने बच्चे को तौलिया में लपेटकर सुरक्षित रखा और तत्काल एंबुलेंस, चाइल्ड हेल्पलाइन और स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची और बच्चे को प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। 

    कुछ घंटे पहले ही हुआ था जन्म

    डॉक्टरों ने बताया कि नवजात का जन्म महज कुछ घंटे पहले ही हुआ था। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए बच्चे को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। 

    रंजू देवी और पति सुरेंद्र मंडल ने नवजात शिशु को गोद लेकर उसका पालन-पोषण करने की इच्छा जताई है। रंजू ने बताया कि उनकी कोई संतान नहीं है, इसलिए वे इस बच्चे की परवरिश करना चाहती हैं। यदि प्रशासन अनुमति देता है तो वे बच्चे को गोद लेकर उसे बेहतर जीवन देना चाहेंगी। 

    फिलहाल नवजात शिशु का इलाज बाल संरक्षण समिति की देखरेख में चल रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और यह पता करने का प्रयास कर रही है कि शिशु को किसने यहां लाकर फेंक दिया है।



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