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    दुमका जिले का वो इलाका जहां नहीं आना चाहती नई-नेवली कन्या, गांव के लोगों को महसूस होती है शर्मिंदगी

    Updated: Wed, 20 May 2026 04:00 PM (IST)

    दुमका के काठीकुंड प्रखंड के बड़ा धनिया पहाड़ी गांव में घटवाल समुदाय गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। ग्रामीण गंदा नदी का पानी पीने को मजबूर हैं, जबकि ल ...और पढ़ें

    दुमका जिले का वो इलाका जहां नहीं आना चाहती नई-नेवली कन्या

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    संक्षेप में पढ़ें

    मुकेश कुमार दास, काठीकुंड (दुमका)। दुमका के काठीकुंड प्रखंड के झिकरा पंचायत के बड़ा धनिया पहाड़ी गांव के नदी टोला और प्रधान टोला में रहने वाले घटवाल समुदाय का जीवन काफी दुरूह है। दोनों टोला में तकरीबन 40 परिवार रहते हैं।

    बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते इन लोगों की त्रासदी का अंदाजा इस बात से लगाई जा सकती है कि अब ये लोग नदी का गंदा पानी पीकर ही कंठ तर करने को विवश हैं। गांव तक जाने के लिए कोई मुकम्मल राह नहीं है।

    गांव की महिलाएं राेज नदी से पानी भरकर कंकरीले पत्थरों और ऊंची चढ़ान चढ़ती हैं तब जाकर परिवार के सदस्यों को पानी नसीब होता है।

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    गांव के ग्रामीण बताते हैं कि उनके जीवन में राम राज जैसी हालत है। एक घाट पर आदमी और पशु दोनों की प्यास बुझती है। बर्तन की सफाई हो या फिर शरीर की सफाई। मवेशियों का प्यास भी इसी नदी के पानी से बुझता है।

    सरकारी योजनाएं बच्चों के लिए खिलौना

    कुछ वर्ष पूर्व पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से गांव में सोलर जलमीनार और वाटर प्यूरीफायर टैंक लगाया गया था। लाखों रुपए खर्च कर पाइपलाइन बिछाई गई थी। लेकिन यह व्यवस्था महज एक सप्ताह में ही दम तोड़ गई।

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    आज वाटर प्यूरी फायर टैंक और पाइपलाइन जमीन पर पड़े हैं और यह बच्चों के खेलने की सामग्री बन चुका है। इसकी सुध तो न तो विभाग को है और ना ही जनप्रतिनिधियों को यहां के ग्रामीणों की पीड़ा का कोई एहसास है।

    नल तो लगा दिया गया पर पानी एक हफ्ता भी नहीं मिला। पानी के लिए ढलान व ऊंचाई पर चढ़ते-उतरते घुटनों में दर्द हो गया है। डर लगता है कि कहीं पैर फिसला तो पानी भरे बर्तन के साथ हम भी नीचे खाई में न गिर जाएं। - श्रीमति देवी, ग्रामीण

    गांव में मेहमान आने से कतराते हैं। नदी का पानी देखकर वह उसे पीने से मना कर देते हैं। गांव में नई-नवेली दुल्हन भी नहीं आना चाहती है। हमें शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है पर हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हमारी पीड़ा को कोई देखने वाला भी नहीं है। - ललिता देवी, ग्रामीण

    ग्रामीण सुमित्रा देवी ने कहा कि प्रधान टोला के चापाकल से लाल और गंदा पानी निकलता है। इसे पीकर बच्चे बीमार पड़ जाते हैं। इसलिए नदी में चुआं बनाकर पानी छान कर किसी तरह से इसका ही इस्तेमाल करते हैं।

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    ग्रामीण गौरी देवी ने बताया कि रात में प्यास लगे तो डर के मारे नदी नहीं जा सकते हैं। दिन भर सिर्फ पानी ढोने में ही सारा समय निकल जाता है। सरकार ने हमें सिर्फ पाइप दिया है पानी नहीं। हम ग्रामीणों की पीड़ा का हल निकले यही गुहार लगाते हैं।

    ग्राम प्रधान जगदीश राय ने कहा कि हमने समस्या को लेकर कई बार प्रखंड मुख्यालय तक गुहार लगाई है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीण नदी के भरोसे ही जी रहे हैं। सरकार व प्रशासन को ग्रामीणों की पीड़ा व दर्द को समझने की जरूरत है। ग्रामीणों में आक्रोश गहराता जा रहा है।

    धनिया पहाड़ी गांव में पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए विभाग त्वरित पहल करेगा। पहले से स्थापित चापाकल और ठप पड़ी जलमीनार की अविलंब मरम्मत कराया जाएगा। इसके अलावा योजना के निष्क्रिय होने की तकनीकी कारणों की जांच कर बाकी बची समस्याओं का भी स्थायी निदान किया जाएगा। - रौनक कुमार, कनीय अभियंता, पेयजल स्वच्छता विभाग, काठीकुंड

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