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    गढ़वा में खाद की कालाबाजारी, तय मूल्य से दोगुने दाम पर बिक रही यूरिया और DAP

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 10:55 AM (IST)

    गढ़वा के डंडई प्रखंड में खरीफ सीजन के बीच खाद की कालाबाजारी चरम पर है, जहाँ यूरिया और डीएपी निर्धारित मूल्य से दोगुने दाम पर बेची जा रही है। ...और पढ़ें

    दोगुने दाम पर बिक रही यूरिया और DAP

    दोगुने दाम पर बिक रही यूरिया और DAP

    HighLights

    1. डंडई प्रखंड में खाद की कालाबाजारी चरम पर है।

    2. यूरिया और डीएपी निर्धारित मूल्य से दोगुने दाम पर बिक रही।

    3. किसानों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    संवाद सूत्र, डंडई (गढ़वा)। खरीफ सीजन के बीच डंडई प्रखंड में खाद की कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है। प्रखंड में अभी पर्याप्त बारिश भी नहीं हुई है, लेकिन किसानों के बीच खाद की किल्लत और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आने लगी हैं। धान की खेती की तैयारी में जुटे किसान खाद की व्यवस्था के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। 

    सरकार किसानों को निर्धारित मूल्य पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। यूरिया और डीएपी खुलेआम निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेची जा रही है।खाद विक्रेता बेहिसाब रुपये की उगाही कर रहे हैं। 

    450 से 500 रुपये तक में बेची जा रही बोरी

    किसान समय पर खेतों में खाद डालने के लिए महंगे दाम चुकाने को विवश हैं, जबकि प्रशासनिक कार्रवाई अब तक धरातल पर नहीं दिख रही है। सरकारी दर के अनुसार यूरिया की एक बोरी 266.50 रुपये में उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन किसानों से यही बोरी 450 से 500 रुपये तक में बेची जा रही है। इसी तरह 1350 से 1650 रुपये के बीच निर्धारित मूल्य वाली डीएपी 2200 से 2400 रुपये तक में बेची जा रही है।

    दुकानदारों ने थोक विक्रेताओं पर लगाया आरोप

    खाद विक्रेताओं का कहना है कि वे भी ऊंचे दाम पर खाद खरीदने को मजबूर हैं। डीलरों से यूरिया 380 रुपये प्रति बोरी व डीएपी 2050 रुपये तक में मिल रही है। नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, कैल्शियम समेत अन्य उत्पाद खरीदने की शर्त पर ही खाद उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में खुदरा विक्रेताओं के लिए निर्धारित सरकारी दर पर खाद बेचना संभव नहीं रह जाता। 

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    विक्रेताओं का कहना है कि यदि वे इसकी शिकायत करते हैं तो थोक विक्रेता किसी न किसी बहाने, जैसे खाद उपलब्ध नहीं होने या अन्य कारणों का हवाला देकर, उनकी खाद की आपूर्ति बंद कर देंगे। इसी डर से वे शिकायत करने से बचते हैं। किसानों ने जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    हर साल खाद के समय यही स्थिति बनती है। विरोध करने पर खाद नहीं मिलने की बात कह दी जाती है। –  लालबहादुर सिंह, किसान।

    सरकार सस्ती दर पर खाद देने की बात करती है, लेकिन 266 रुपये वाली यूरिया 450 से 500 रुपये में खरीदनी पड़ रही है।- जितेंद्र यादव,किसान।

    खाद नहीं मिलेगी तो फसल चौपट हो जाएगी। दुकानदार एक बोरी खाद के लिए तय रेट से 200-300 रुपये ज्यादा मांग रहे हैं। फसल बचाने के लिए जेब खाली करके महंगी खाद खरीदने के सिवा हमारे पास कोई रास्ता नहीं है।- चंद्रिका यादव,किसान 

    किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर ही खाद उपलब्ध कराने का निर्देश सभी लाइसेंसधारी विक्रेताओं को दिया गया है। यदि कहीं भी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेचने या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों से अपील है कि अधिक कीमत वसूले जाने पर बिल के साथ लिखित शिकायत करें, ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है और सभी किसानों को आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जा रही है। - खुशबू कुमारी, जिला कृषि पदाधिकारी, गढ़वा।