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सोन-कनहर नदियों के बढ़ते जलस्तर से गढ़वा में बाढ़ का खतरा, चार प्रखंडों में बढ़ी चिंता

Published: Tue, 01 Sep 2026 03:26 PM (IST)

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पहाड़ी कैचमेंट क्षेत्रों में लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण ...और पढ़ें

सोन-कनहर नदियों के बढ़ते जलस्तर से गढ़वा में बाढ़ का खतरा, चार प्रखंडों में बढ़ी चिंता (AI Generated Image)

सोन-कनहर नदियों के बढ़ते जलस्तर से गढ़वा में बाढ़ का खतरा, चार प्रखंडों में बढ़ी चिंता (AI Generated Image)

HighLights

  1. सोन-कनहर नदियों का जलस्तर बढ़ने से गढ़वा में बाढ़ का खतरा।

  2. बाणसागर, कनहर, ओबरा जलाशयों से पानी छोड़े जाने से स्थिति गंभीर।

  3. रिहंद जलाशय भी अधिकतम क्षमता के करीब, तटीय गांवों में सतर्कता।

जागरण संवाददाता, गढ़वा। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पहाड़ी कैचमेंट क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर सोन और कनहर नदियों के जलस्तर पर दिखने लगा है। बाणसागर, कनहर (अमवार) और ओबरा जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण गढ़वा जिले के सोन-कनहर तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

सोन नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर खरौंधी, केतार, हरिहरपुर और कांडी प्रखंड के नदी तट से सटे गांवों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बाणसागर से 3277 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है| जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के बाणसागर जलाशय के आठ रेडियल गेटों को दो-दो मीटर तक खोला गया है। इससे सोन नदी में करीब 3277 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।

वहीं, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कैचमेंट क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण सोनभद्र स्थित कनहर (अमवार) जलाशय का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। इसके बाद जलाशय के आठ स्पिलवे गेटों को दो-दो मीटर तक खोला गया है।

इसके अलावा ओबरा डैम का आठ नंबर गेट भी करीब तीन फीट तक खोला गया है। इससे रेणु नदी के रास्ते पानी सोन नदी में पहुंच रहा है। विभिन्न जलाशयों से हो रही लगातार जल निकासी के कारण सोन नदी के जलस्तर में और वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

रिहंद में अधिकतम क्षमता के करीब पहुंचा जलस्तर

रिहंद जलाशय का जलस्तर भी अपनी अधिकतम क्षमता 870 फीट के बेहद करीब पहुंच गया है। जलस्तर 869.1 फीट तक पहुंचने की जानकारी है। हालांकि, रिहंद जलाशय का मुख्य फाटक फिलहाल नहीं खोला गया है।

जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए हाइड्रो पावर प्लांट की सभी छह टरबाइनों को पूरी क्षमता से चलाया जा रहा है। इससे लगातार बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर छोड़ा जा रहा है।

जलाशयों से पानी छोड़े जाने और सोन नदी के बढ़ते प्रवाह के कारण गढ़वा के सीमावर्ती तटीय क्षेत्रों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। जलस्तर में लगातार वृद्धि होने पर नदी के आसपास के निचले इलाकों में स्थिति गंभीर हो सकती है।

तटीय गांवों में सतर्कता जरूरी

फिलहाल, गढ़वा जिले में प्रशासन की ओर से मुनादी कराए जाने की पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि, नदी के बढ़ते जलस्तर और जलाशयों से लगातार हो रही जल निकासी को देखते हुए तटीय इलाकों में सतर्कता जरूरी है।

ग्रामीणों को सोन और कनहर नदी के किनारे जाने से बचने तथा मवेशियों को भी नदी के आसपास नहीं ले जाने की सलाह दी जा रही है।

जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि की स्थिति में निचले इलाकों के ग्रामीणों को सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।