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'कागज़ दिखाओ वरना...!' गढ़वा में ईरानी परिवारों की नागरिकता पर फंसा पेंच, SIR जांच में बड़ा खुलासा

Published: Sun, 13 Sep 2026 12:23 PM (IST)

गढ़वा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के तहत ईरानी मूल के परिवारों के नाम सामने आने ...और पढ़ें

गढ़वा में ईरानी मूल के लोगों का पीएम आवास योजना से बना घर। जागरण

गढ़वा में ईरानी मूल के लोगों का पीएम आवास योजना से बना घर। जागरण

संवाद सहयोगी, गढ़वा। गढ़वा जिला मुख्यालय के नगर परिषद क्षेत्र स्थित वार्ड नंबर 1 और वार्ड नंबर 3 के सोनपुरवा मोहल्ले में रेलवे लाइन पार रहने वाले ईरानी मूल के परिवारों का नाम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम में सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

इस मामले के उजागर होने के बाद जहां एक तरफ प्रशासनिक अधिकारी सीधा बयान देने से बच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरानी मूल के परिवारों में भी भारी बेचैनी देखी जा रही है।

अंचल टीम ने शुरू की जमीन के कागजातों की पड़ताल

मामले के सुर्खियों में आते ही प्रशासनिक महकमा पूरी तरह रेस हो गया है। एसआईआर के तहत मतदाता सूची में नाम शामिल होने की प्रक्रिया के साथ-साथ अब इन परिवारों को मिले प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य सरकारी लाभों की भी गहन जांच शुरू कर दी गई है।

शनिवार को अंचल कार्यालय के कर्मियों ने वार्ड नंबर 3 में पहुंचकर इन परिवारों से जमीन संबंधी दस्तावेजों की जानकारी ली। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इन लोगों ने रजिस्टर्ड केवाला के जरिए जमीन खरीदी है, जिस पर उनके मकान बने हैं। इतना ही नहीं, उक्त जमीनों का नामांतरण (म्यूटेशन) भी हो चुका है और नियमित रूप से रसीद भी कट रही है।

अपरिचितों से बात करने से कतरा रहे लोग, महिलाओं में आक्रोश

जांच की आंच पहुंचते ही सोनपुरवा मोहल्ले के ईरानी मूल के निवासी किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करने से परहेज कर रहे हैं। मोहल्ले में पहुंचने वाले बाहरी लोगों को देखते ही माहौल तनावपूर्ण हो जाता है और विशेषकर महिलाएं बेहद आक्रामक रुख अपना रही हैं। वार्ड नंबर 3 स्थिति इस मोहल्ले के भीतर इन लोगों ने अपना एक छोटा सा वारगाह भी बना रखा है।

1966 और 1980 में गढ़वा पहुंचे थे पूर्वज

ईरानी मूल के 53 वर्षीय हामिद अली ने बताया कि वह गढ़वा और लातेहार समेत विभिन्न न्यायालय परिसरों में चश्मा बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके पूर्वज ईरान से आकर पहले मध्य प्रदेश में बसे थे, जिसके बाद उनके माता-पिता वर्ष 1966 में गढ़वा आए और झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने लगे।

वहीं एक अन्य निवासी जलाल अली ने बताया कि उनका परिवार 1980 में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से यहां आया था। उन्होंने बताया कि इस समुदाय के लोग महाराष्ट्र के पुणे, भुसावल और छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में भी रहते हैं। वार्ड नंबर 3 में पांच परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ मिला है। जलाल अली के अनुसार, उनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड और 1992 का केवाला मौजूद है, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के तहत नागरिकता साबित करने के लिए नोटिस मिला है जिसके लिए वे दस्तावेज जुटाने में लगे हैं।

वोट बैंक की राजनीति के कारण सुविधाएं मिलने का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में ईरानी मूल के लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने और तमाम सरकारी सुविधाएं मुहैया कराने के पीछे सीधी वोट बैंक की राजनीति रही है। नगर परिषद चुनाव (वर्ष 2008) की शुरुआत के बाद से ही इन्हें सुविधाएं देने का खेल शुरू हुआ।

स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि गढ़वा में कई पीढ़ियों से रह रहे जरूरतमंद स्थानीय लोग आज भी जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं और उन्हें पीएम आवास नहीं मिल सका, जबकि वोट बैंक साधने के लिए बाहरी ईरानी मूल के लोगों को पीएम आवास, राशन कार्ड, बिजली कनेक्शन और आधार कार्ड आसानी से उपलब्ध करा दिए गए। हालांकि, अब एसआईआर की कड़ाई के कारण पूरा मामला छनकर बाहर आने लगा है। 

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