Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गढ़वा में 50% सब्सिडी के सहारे दलहन की पैदावार बढ़ाने पर जोर, मूंग-अरहर की फसलों से लहलहाएंगे खेत

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    गढ़वा जिले में किसानों को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विभाग ने 'मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज' योजना शुरू की है। ...और पढ़ें

    AI Generated Image

    AI Generated Image

    HighLights

    1. गढ़वा में दलहन उत्पादन आत्मनिर्भरता मिशन शुरू।

    2. मूंग और अरहर के मुफ्त बीज वितरित।

    3. पारदर्शिता के लिए ब्लॉक चेन पोर्टल का उपयोग।

    अंजनी कुमार उपाध्याय, गढ़वा। गढ़वा जिले के किसानों को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज योजना के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मुफ्त मिनी किट का वितरण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में मूंग और अरहर की खेती को बढ़ावा देना और पैदावार में वृद्धि करना है।

    योजना के तहत जिले के 38 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बुआई का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभाग द्वारा किसानों के बीच कुल 952 किलोग्राम मूंग के बीज का नि:शुल्क वितरण किया गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मूंग की बुआई 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से की गई है।

    पांच प्रखंडों में 260 हेक्टेयर में लहलहाएगी अरहर की फसल

    मूंग के साथ-साथ अरहर की खेती पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिले के पांच चयनित प्रखंडों में क्लस्टर बनाकर 260 हेक्टेयर क्षेत्र में अरहर लगाने का लक्ष्य पूरा किया गया है। इसके लिए किसानों के बीच कुल 52 क्विंटल अरहर के बीज का नि:शुल्क वितरण हुआ है, जिसकी बुआई 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से की जा रही है।

    कृषि विभाग के अनुसार, रमकंडा प्रखंड में 50 हेक्टेयर, श्रीबंशीधर नगर में 60 हेक्टेयर, भवनाथपुर में 50 हेक्टेयर, रंका में 50 हेक्टेयर और डंडई प्रखंड में 50 हेक्टेयर क्षेत्र को अरहर की खेती के लिए चयनित कर वहां क्लस्टर बनाए गए हैं।

    खबरें और भी

    50 फीसदी अनुदान पर मिले बीज, दो योजनाओं के तहत हुआ आवंटन

    जिले को इस बार कुल 1060 क्विंटल अरहर के बीज का आवंटन प्राप्त हुआ है, जिसे 50 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत दो अलग-अलग योजनाओं के जरिए काम हो रहा है।

    बीज विनिमय योजना के तहत कुल 100 क्विंटल बीज का आवंटन हुआ था। इसके एवज में 45.50 क्विंटल की डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) जमा की गई, जिसके बाद 41 क्विंटल बीज लैम्पस और पैक्स के माध्यम से प्राप्त कर लिया गया है।

    आत्मनिर्भरता पल्सेज सीड एक्सचेंज योजना के तहत जिले को 960 क्विंटल बीज आवंटित किया गया था। इसमें से अब तक 233.80 क्विंटल बीज की खरीदारी की जा चुकी है, जिसमें से 178.80 क्विंटल बीज गढ़वा पहुंच चुका है और लैम्पस-पैक्स के जरिए किसानों के बीच इसका वितरण तेजी से किया जा रहा है।

    पारदर्शिता के लिए ब्लॉक चेन पोर्टल का सहारा, जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चयन

    योजना का लाभ वास्तविक और जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे, इसके लिए क्लस्टर और लाभार्थियों के चयन में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। क्लस्टर चयन के लिए आयोजित बैठकों में प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड प्रमुख, जिला परिषद सदस्य, विधायक व सांसद प्रतिनिधि के साथ-साथ बीटीएम, एटीएम और बीएओ जैसे कृषि अधिकारी शामिल रहते हैं।

    चयनित पंचायतों में मुखिया द्वारा अनुशंसित सूची के आधार पर ही किसानों को बीज दिया जा रहा है। इस पूरी वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए इसे ब्लाक चेन पोर्टल से जोड़ा गया है। वहीं, धरातल पर किसानों की मदद और सत्यापन के लिए किसान मित्र भी पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कृषि विभाग का दावा है कि इस पहल से जिले में दलहन उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

    यह भी पढ़ें- झारखंड में मेडिकल छात्रों के लिए खुशखबरी, रिम्स में MBBS की 250 सीटों को NMC की मंजूरी