5G के दौर में नेटवर्क की ऐसी मजबूरी! गढ़वा में बीमार बेटे के कॉल के इंतजार में मां ने पेड़ पर बांधा फोन
झारखंड के गढ़वा के खरौंधी प्रखंड स्थित खोखा और पडरच गांवों में मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या है, जहाँ ग्रामीणों ...और पढ़ें
HighLights
खोखा और पडरच गांवों में मोबाइल नेटवर्क की भारी कमी।
ग्रामीणों को नेटवर्क के लिए 20-30 फीट ऊँचे पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है।
संकेत कुमार श्रीवास्तव, खरौंधी (गढ़वा)। देश आज डिजिटल युग में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गांव-गांव तक इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन झारखंड के गढ़वा के खरौंधी प्रखंड के सोन तटीय क्षेत्र स्थित खोखा तथा पडरच गांव के ग्रामीण आज भी मोबाइल नेटवर्क की सुविधा से वंचित हैं।
स्थिति यह है कि यहां लोगों को मोबाइल में नेटवर्क लाने के लिए 20 से 30 फीट ऊंचे पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है। पेड़ की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद किसी तरह मोबाइल में नेटवर्क आता है, तब ग्रामीण अपने परिजनों और सगे-संबंधियों से बातचीत कर पाते हैं। यह तक की अपनों की एक आवाज सुनने के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के लगभग 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी खोखा में मोबाइल नेटवर्क की समुचित व्यवस्था नहीं होना बेहद चिंता का विषय है। मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण लोगों को रोजमर्रा के काम में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर आपात स्थिति में किसी व्यक्ति से तत्काल संपर्क करना मुश्किल हो जाता है।
खोखा निवासी पंकज कुमार सिंह, पवन कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, कौशल कुमार सिंह, अशोक कुमार सिंह और सतीश कुमार सिंह ने बताया कि नेटवर्क नहीं रहने के कारण कई बार महत्वपूर्ण संदेश समय पर नहीं मिल पाते हैं। मोबाइल पर आने वाले जरूरी मैसेज घंटों बाद प्राप्त होते हैं। इसके अलावा गांव में होने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी भी समय पर संबंधित लोगों तक पहुंचाने में परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने कहा कि मोबाइल नेटवर्क आज केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा, बैंकिंग, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, रोजगार और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में नेटवर्क सुविधा से वंचित रहना ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन गई है।
ग्रामीणों ने डिजिटल इंडिया अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर देश में 5 जी नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध है। वहीं दूसरी ओर सोन तटीय क्षेत्र के खोखा गांव में लोगों को 2 जी स्तर की नेटवर्क सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इनका कहना है कि डिजिटल इंडिया का लाभ तभी गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा, जब दूर-दराज और सोन तटीय इलाकों में भी मोबाइल नेटवर्क की मजबूत व्यवस्था होगी।
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ग्रामीणों ने बताया कि नेटवर्क की समस्या के कारण बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई, युवाओं के ऑनलाइन काम और सरकारी योजनाओं से जुड़ी डिजिटल सेवाओं का लाभ लेने में भी परेशानी होती है। कई बार जरूरी काम के लिए ग्रामीणों को नेटवर्क वाले दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रखंड प्रशासन और संबंधित मोबाइल नेटवर्क कंपनियों से खोखा गांव में तत्काल मोबाइल नेटवर्क की व्यवस्था कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि गांव में नेटवर्क टावर अथवा अन्य तकनीकी व्यवस्था स्थापित कर समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि उन्हें मोबाइल नेटवर्क के लिए पेड़ों पर चढ़ने की मजबूरी से निजात मिल सके।
नेटवर्क के लिए पेड़ पर मोबाइल बांधने को मजबूर हैं ग्रामीण
खोखा निवासी कुमारी देवी ने बताया कि गांव में नेटवर्क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उन्होंने कहा कि उनका बच्चा दो दिन से अस्पताल में भर्ती है और अस्पताल से कभी भी फोन आ सकता है। ऐसे में फोन पर नेटवर्क मिल सके, इसके लिए उन्होंने अपना मोबाइल पेड़ की टहनी में बांध दिया और खुद पेड़ के नीचे बैठकर फोन आने का इंतजार कर रही हैं।

कुमारी देवी ने कहा कि अस्पताल से आने वाली जरूरी सूचना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन गांव में नेटवर्क की स्थिति ऐसी है कि मोबाइल पर सही तरीके से बात करना भी मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में उन्हें मोबाइल को पेड़ पर बांधकर नेटवर्क आने का इंतजार करना पड़ रहा है।
