पलामू डिवीजन के 56 क्लर्कों के तबादले पर विवाद, नियमों की अनदेखी और पिक एंड चूज का लगा आरोप
पलामू प्रमंडल में 56 लिपिकों के स्थानांतरण पर 'पिक एंड चूज' नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए विवाद गहरा गया है। प्रभावित लिपिकों ने वर्तमान आदेश को रद्द ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
56 लिपिकों के स्थानांतरण पर 'पिक एंड चूज' का आरोप।
निदेशक के दिशा-निर्देशों की अनदेखी का दावा किया गया।
दक्षिणी छोटानागपुर मॉडल पर पारदर्शी प्रक्रिया की मांग।
जागरण संवाददाता, गढ़वा। पलामू प्रमंडल में क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक, मेदिनीनगर द्वारा हाल ही में एकमुश्त किए गए 56 उच्च एवं निम्न वर्गीय लिपिकों के स्थानांतरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
स्थानांतरण से प्रभावित लिपिकों ने पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पिक एंड चूज नीति पर आधारित बताया है। उनका आरोप है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पत्रांक-2093, दिनांक 12 जून 2026 में जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से तबादले किए गए हैं।
डीएसई कार्यालय, गढ़वा से क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, सदर मेदिनीनगर स्थानांतरित किए गए उच्च वर्गीय लिपिक प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि स्थानांतरण आदेश में निदेशक के पत्र का हवाला तो दिया गया, लेकिन उसकी कंडिका-1, कंडिका-2 एवं कंडिका-3 का पालन नहीं किया गया।
उनका आरोप है कि कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को उसी जिले में उनकी पसंद के स्थान पर पदस्थापित कर दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों को उनकी वरिष्ठता की अनदेखी करते हुए तीन वर्ष की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही दूसरे स्थानों पर भेज दिया गया।
तीन वर्ष का नियम सभी पर समान क्यों नहीं
स्थानांतरण का विरोध कर रहे लिपिकों ने सवाल उठाया कि यदि तीन वर्ष से कम अवधि वाले कर्मचारियों का भी तबादला किया जा रहा था, तो विनय कुमार सिंह, रवि रंजन पाठक, अरुण गिरी, रोशनदान मिंज, सुरेश सिंह सहित कई अन्य कर्मचारियों को किस आधार पर उनके वर्तमान पदस्थापन जिला में ही बनाए रखा गया। उनका कहना है कि इससे स्थानांतरण प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
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लिपिकों ने यह भी आरोप लगाया कि नीरज कुमार सिन्हा वर्ष 1999 से तथा सीतलेश कुमार सिंह वर्ष 2006 से लगातार पलामू जिले में पदस्थापित हैं। इसके बावजूद वर्तमान स्थानांतरण में दोनों को दूसरे जिले भेजने के बजाय फिर से पलामू जिले में ही पदस्थापित कर दिया गया।
विरोध कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि यदि ऐसा उनकी पत्नियों के उसी जिले में शिक्षिका होने के आधार पर किया गया, तो फिर गढ़वा के उच्च वर्गीय लिपिक ओमप्रकाश सिंह के साथ अलग व्यवहार क्यों किया गया। उनका कहना है कि ओमप्रकाश सिंह की पत्नी भी गढ़वा जिले के मेराल में शिक्षिका हैं, फिर भी उनका तबादला पलामू कर दिया गया। इसे कर्मचारियों ने दोहरा मापदंड बताया है।
दिव्यांग कर्मचारी के तबादले पर भी उठे सवाल
लिपिकों ने आरोप लगाया कि पलामू प्रमंडल के एकमात्र चिन्हित दिव्यांग लिपिक कन्हाई सिंह के मामले में भी विभागीय नियमों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के निर्देशानुसार दिव्यांग कर्मचारी का स्थानांतरण उसके निवास से पांच किलोमीटर से अधिक दूरी पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद उनका तबादला लगभग 40 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग कॉलेज रेहला में कर दिया गया।
अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारी के बार-बार तबादले पर आपत्ति
विरोध कर रहे कर्मचारियों ने स्नेहसिल मनीष का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी अनुकंपा नियुक्ति वर्ष 2023 में डीएसई कार्यालय, पलामू में हुई थी। एक वर्ष पूरा होने से पहले ही वर्ष 2024 में उन्हें क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक कार्यालय भेज दिया गया और अब वर्तमान स्थानांतरण आदेश में उन्हें जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, गढ़वा भेज दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि इतनी कम अवधि में लगातार तबादला करना भी नियमों की भावना के विपरीत है।
दक्षिणी छोटानागपुर मॉडल अपनाने की मांग
लिपिकों ने मांग की है कि वर्तमान स्थानांतरण आदेश को तत्काल निरस्त कर दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की तर्ज पर पूरी प्रक्रिया दोबारा पारदर्शी तरीके से की जाए। उनका कहना है कि दक्षिणी छोटानागपुर में माध्यमिक शिक्षा निदेशक के 12 जून 2026 के पत्र में दिए गए दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन किया गया। वहां जारी स्थानांतरण आदेश में प्रत्येक कर्मचारी के नाम के सामने यह भी स्पष्ट उल्लेख किया गया कि निदेशक के पत्र की किस कंडिका के आधार पर उनका तबादला किया गया है। इसी कारण उस प्रक्रिया की राज्यभर में सराहना हो रही है।
विरोध कर रहे लिपिकों का कहना है कि यदि स्थानांतरण प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का समान रूप से पालन नहीं किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर वर्तमान आदेश को निरस्त किया जाना चाहिए। साथ ही, सभी कर्मचारियों की वरिष्ठता, सेवा अवधि, दिव्यांगता, पारिवारिक परिस्थितियों तथा निदेशक के दिशा-निर्देशों को आधार बनाकर नई स्थानांतरण सूची जारी की जाए, ताकि कर्मचारियों में पारदर्शिता और न्याय का विश्वास कायम रह सके।