सोन नदी का पानी बदलेगा गढ़वा की तकदीर, सोन-कनहर सिंचाई परियोजना से किसानों को मिलेगा लाभ
सोन नदी के जल बंटवारे पर बिहार-झारखंड का 26 साल पुराना विवाद समाप्त होने से गढ़वा में सोन-कनहर सिंचाई परियोजना को नई गति मिली है।

गढ़वा जिले के हरिहरपुर से होकर गुजर रही सोन नदी। (जागरण)
HighLights
सोन नदी जल बंटवारा विवाद 26 साल बाद समाप्त हुआ।
गढ़वा की सोन-कनहर परियोजना को अब नई गति मिलेगी।
दिसंबर 2026 तक परियोजना के उद्घाटन का लक्ष्य निर्धारित।
संदीप केसरी शौर्य, गढ़वा। सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच 26 वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त होने के बाद गढ़वा जिले के विकास की नई संभावनाएं खुल गई हैं।
हाल में हुए ऐतिहासिक जल बंटवारा समझौते के तहत झारखंड को सोन नदी के पानी में आधिकारिक हिस्सा मिलने से जिले की महत्वाकांक्षी सोन-कनहर पाइपलाइन सिंचाई परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन ने परियोजना के शेष कार्यों को तेज करते हुए दिसंबर 2026 तक योजना के उद्घाटन का लक्ष्य निर्धारित किया है। उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित कंपनी एलएनटी को सख्त निर्देश दिए हैं।
वर्ष 2000 में झारखंड के गठन के बाद से सोन नदी के जल हिस्सेदारी को लेकर विवाद लंबित था। नए समझौते के तहत अविभाजित बिहार को पूर्व में आवंटित 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी में से झारखंड को 2.0 मिलियन एकड़ फीट पानी का हिस्सा मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
इससे गढ़वा जैसे सोन नदी से जुड़े सीमावर्ती जिले को सिंचाई, जल संरक्षण और पेयजल योजनाओं के लिए बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
सोन-कनहर परियोजना को मिलेगी गति
गढ़वा जिले में चल रही सोन-कनहर परियोजना को क्षेत्र के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना के तहत प्रस्तावित तीन पम्प हाउस में से दो का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।
तीसरा पम्प हाउस कांडी अंचल के मौजा-मझिगांवा में वन विभाग की भूमि पर बनाया जाना है। इसके लिए वन विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त हो चुकी है। उपायुक्त ने संबंधित एजेंसी को शीघ्र निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया है।
परियोजना क्षेत्र में आने वाले वृक्षों का संयुक्त निरीक्षण भी किया जा रहा है। निरीक्षण के बाद राज्य स्तरीय समिति से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त ने संयुक्त निरीक्षण की प्रक्रिया जल्द पूरी कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, ताकि परियोजना के कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो।
उपायुक्त ने सोन-कनहर परियोजना को सरकार की प्राथमिकता वाली और गढ़वा के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योजना बताया है।
उन्होंने परियोजना से जुड़े विभागों और कार्यदायी एजेंसियों को बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। पम्प हाउस निर्माण के अलावा अंडरग्राउंड पाइपलाइन, एनबीपीटी, बीपी सहित अन्य शेष कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने पर जोर दिया गया है।
एलएनटी कंपनी के प्रतिनिधि को दिसंबर 2026 तक योजना के शुभारंभ के लिए सभी जरूरी कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
सिंचाई की मिलेगी सुविधा
परियोजना के पूर्ण होने पर सोन और कनहर नदी के जल का उपयोग कर जिले के बड़े हिस्से तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने की योजना है।
उम्मीद है कि परियोजना के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचने के साथ जिले के जलाशयों, आहरों और तालाबों को भी भरने में मदद मिलेगी।
इससे सूखे के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। कृषि उत्पादन बढ़ने, दोहरी फसल को बढ़ावा मिलने और ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले मौसमी पलायन में कमी आने की भी संभावना है।
सोन नदी जल बंटवारे का समझौता और सोन-कनहर परियोजना की तेज होती रफ्तार गढ़वा के लिए विकास की नई तस्वीर पेश कर रही है।
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर योजना शुरू होती है तो आने वाले वर्षों में यह परियोजना जिले की कृषि और जल व्यवस्था की दिशा बदल सकती है।
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