गिरिडीह में अंडा फार्म में हाथियों का धावा, मुर्गियों का दाना चट कर मचाई तबाही
Giridih News: हाथियों के झुंड ने गिरिडीह के बिरनी में एक अंडा उत्पादन फार्म में तोड़फोड़ कर लगभग पांच लाख रुपये का नुकसान किया। ...और पढ़ें

गिरिडीह के बिरनी में अंडा फार्म को हाथियों ने किया नष्ट।(फोटो जागरण)
HighLights
हाथियों ने बिरनी के अंडा फार्म में पांच लाख का नुकसान किया।
एक सप्ताह से हाथियों का आतंक, ग्रामीणों में दहशत का माहौल।
तीन माह में हाथियों के हमले से तीन लोगों की मौत हुई।
संवाद सहयोगी, बिरनी (गिरिडीह)। झारखंड के गिरिडीह जिले के बिरनी क्षेत्र में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार रात पंदनाकला के निखिल बंसल अंडा उत्पादन फार्म में हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया और करीब पांच लाख रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
हांलाकि मुर्गी -चूजा सुरक्षित हैं। इसके अलावा गांव के ग्रामीणों की फसल नष्ट कर दी। हाथियों के झुंड लेवरा व दलांगी के जंगल में डेरा जमाए है।
फार्म में रखे दाना-दवा चट कर गए
गुरुवार शाम करीब आठ बजे जंगल से निकल कर हाथी उक्त फर्म में पहुंचे। रातभर फार्म में विचरण करते हुए हाथियों ने शेड को तोड़ दिया और रखा हुआ मुर्गी दाना में मक्का ,खली ,सोयबड़ी, दवा चट कर गया। साथ ही फार्म की चारदीवारी और अन्य सामानों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
फार्म की देखरेख करने वाला केदार यादव ने बताया कि इस घटना से उन्हें करीब पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उत्पात मचाने के बाद शुक्रवार सुबह हाथियों का झुंड दलांगी और लेवरा जंगल की ओर चला गया। वन विभाग की टीम हाथियों पर नजर रखी हुई है और उनके पीछे-पीछे चल रही है।
लगातार तबाही से ग्रामीण भयभीत
पिछले एक सप्ताह से बिरनी के विभिन्न गांवों में हाथियों ने जमकर तबाही मचा रखी है। हाथियों ने घर, चारदीवारी और खेतों में खड़ी फसल को नष्ट कर दी। मंगलवार शाम को जरीडीह गांव में हाथियों के हमले में उपेंद्र यादव नामक युवक की मौत भी हो गई थी।
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लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत है। लोग रातभर जागकर हाथियों को खदेड़ने को मजबूर हैं।
क्या कहते है ग्रामीण
ग्रामीण नरेश यादव , मोइन अंसारी, कमलकांत सिंह, रियाज अंसारी ,आदि ने कहा कि वन विभाग के कर्मी हाथियों को निकालने के लिए पीछे जरूर चल रहे हैं लेकिन निकालने में सक्षम नहीं हो रहे है। उनके पास संसाधन की काफी कमी है।
वन विभाग के पास भरपूर मात्रा में संसाधन होता तो ग्रामीण उन कर्मियों से पूछ सकते थे कि संसाधन होने के बाद भी हाथियों को सुरक्षित बड़े जंगल क्यों नहीं ले जा रहे है।
ग्रामीण के सहयोग से कर्मियों इतना कर पा रहे है। जिम्मेवार सरकार व विभाग के वरीय अधिकारी है। हाथियों को भगाने के नाम पर लाखों खर्च के बाद भी कारीडोर नहीं बन पाया।
इनकी फसल नष्ट हुई
वन विभाग के प्रभारी वनपाल योगेंद्र प्रसाद व अबोध महथा ने कहा कि हाथियों का झुंड पिछले एक सप्ताह से बिरनी में डेरा डाला हुआ है। बिरनी से निकालने के बाद भी हाथी पुनः लौट जाते हैं। लोगों से अपील की है कि वे हाथियों के पास न जाएं।
नुकसान का आकलन कर पीड़ितों को मुआवजा विभाग से दिया जाएगा ।अंडा उत्पादन फार्म के अलावा ग्रामीण अनिता देवी ,ललिता देवी ,प्रभु रजक आदि की चारदीवारी व फसल नष्ट कर दी गई।
तीन माह में तीन लोगों की ली जान
इसी नौ मई को बंगराकला के पेमा साव की पत्नी रधिया देवी अपने खेत में धान का बिचड़ा डाल रही थी। जंगल से हाथियों का झुंड बाहर निकल कर उसे मार डाला। तीन जुलाई को कररी के सेंट्रिंग मिस्त्री रामचंद्र यादव को काम से घर लौटने के दौरान हाथियों ने कुचल कर मार दिया।
28 जुलाई शाम को जरीडीह जंगल में डेरा जमाए हाथियों के पास सेल्फी लेने गए गांव के युवक उपेंद्र यादव को भी हाथियों ने घेर कर मार डाला।
वन विभाग हाथियों को भगाने के लिए पूरी तरह प्रयासरत है। हाथियों को स्थायी रूप से कहीं रखने का नहीं है। हाथियों के चलने की अपनी दिशा होती है। उसे भगाने में वन कर्मियों के अलावे स्पेशल टीम लगी है। हाथियों से हुई क्षति का वन विभाग मुआवजा देगा।
अनिल कुमार सिंह, रेंजर