Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    झारखंड के पीरटांड में ‘खाट वाली हेल्थ सर्विस’! सड़क के अभाव में गर्भवती को पैदल ढोना पड़ा

    Updated: Wed, 27 May 2026 05:14 PM (IST)

    Jharkhand Shock: गिरिडीह के पीरटांड़ प्रखंड में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा। ...और पढ़ें

    प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को खाट पर लेकर अस्पताल की ओर जाते ग्रामीण।(फोटोः जागरण)

    प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को खाट पर लेकर अस्पताल की ओर जाते ग्रामीण।(फोटोः जागरण)

    HighLights

    1. गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल ले गए ग्रामीण।

    2. सड़क न होने से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची।

    3. बुनियादी सुविधाओं की कमी पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश।

    संवाद सहयोगी, पीरटांड़ (गिरिडीह)। Giridih News: झारखंड बने 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन गिरिडीह के पीरटांड़ प्रखंड में आज भी स्वास्थ्य व्यवस्था खाट के सहारे चल रही है। दालुवाडीह गांव में प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को एंबुलेंस नहीं मिली, क्योंकि गांव तक सड़क ही नहीं है।

    Giridih Health Service

    मजबूर ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लादकर करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, तब जाकर उसे अस्पताल भेजा जा सका। इस घटना ने एक बार फिर इलाके में सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदहाल तस्वीर सामने ला दी है।

    एंबुलेंस उपलब्ध कराने से स्वास्थ्य विभाग ने खड़े किए हाथ 

    जानकारी के अनुसार, बुधवार को दालुवाडीह निवासी गर्भवती महिला सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने एंबुलेंस सेवा के लिए स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस पहुंचने से मना कर दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने महिला को खाट पर लिटाकर कठिन रास्तों से होते हुए पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से वाहन की व्यवस्था कर उसे अस्पताल भेजा गया।

    ऐसी परेशानियों से आए दिन ग्रामीणों का होता सामना

    परिजनों ने बताया कि सड़क नहीं रहने के कारण महिला की हालत और गंभीर हो गई। यदि गांव तक सड़क होती तो एंबुलेंस सीधे पहुंच जाती और समय पर इलाज मिल पाता। ग्रामीणों का कहना है कि पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे दर्जनों गांवों के लोग हर दिन परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

    खबरें और भी

    ग्रामीणों के अनुसार, सड़क नहीं रहने से कुरुवारांड, दालुवाडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा समेत कई गांव प्रभावित हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। बीमार, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।

    नेताओं से ग्रामीण नाराज

    घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बुधन सोरेन, सुशील मुर्मू, सानो मरांडी, गोपाल मुर्मू, सोमरा मुर्मू, पतिराम मरांडी और बाबूलाल हांसदा समेत कई ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की सुध लेने तक कोई नहीं आता।

    ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार मरीजों को खाट पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आज तक इस ओर नहीं गया। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की बदहाल सड़क व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है।