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    श्मशान की जमीन पर विवाद, बुजुर्ग का अंतिम संस्कार अटका; गिरिडीह के बक्सीगरजा गांव में तनाव

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 09:04 PM (IST)

    झारखंड के गिरिडीह जिले के बक्सीगरजा गांव में श्मशान की जमीन को लेकर विवाद के कारण 65 वर्षीय बुजुर्ग जल्फा टुडू का अंतिम संस्कार कई घंटों तक रुका रहा। ...और पढ़ें

    श्मशान घाट विवाद से उपजे तनाव के मद्देनजर बक्सीगरजा गांव में पुलिस मुस्तैद।(फोटो जागरण)

    श्मशान घाट विवाद से उपजे तनाव के मद्देनजर बक्सीगरजा गांव में पुलिस मुस्तैद।(फोटो जागरण)

    HighLights

    1. गिरिडीह के बक्सीगरजा गांव में श्मशान भूमि पर विवाद।

    2. 65 वर्षीय बुजुर्ग जल्फा टुडू का अंतिम संस्कार रुका।

    3. ग्रामीण सार्वजनिक श्मशान का दावा कर रहे, पुलिस मौके पर।

    संवाद सूत्र, गांडेय (गिरिडीह)। झारखंड के गिरिडीह जिले के गांडेय थाना क्षेत्र के बक्सीगरजा गांव में शुक्रवार को एक मार्मिक घटना सामने आई। श्मशान की कथित गैरमजरुआ जमीन को लेकर उपजे विवाद के कारण 65 वर्षीय जल्फा टुडू का शव कई घंटों तक श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार का इंतजार करता रहा। ग्रामीणों ने शव दफनाने का विरोध कर दिया, जिससे गांव में तनाव का माहौल बन गया।

    ग्रामीणों ने सार्वजनिक श्मशान पर कब्जे का लगाया आरोप 

    मृतक के पुत्र सुखीलाल टुडू अपने स्वजनों के साथ पिता का शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने उन्हें रोक दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जमीन पहले पूरे आदिवासी समाज के सार्वजनिक श्मशान के रूप में इस्तेमाल होती थी, लेकिन कुछ वर्ष पहले सुखीलाल टुडू ने कथित रूप से इसे अपने भाइयों के नाम बंदोबस्त कराकर खेती शुरू कर दी। उनका कहना है कि पहले श्मशान की जमीन को सार्वजनिक किया जाए, तभी वहां अंतिम संस्कार होने दिया जाएगा।

    सुखीलाल ने आरोपों को खारिज किया 

    सुखीलाल टुडू ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित जमीन कभी श्मशान नहीं रही। उनके अनुसार वर्ष 1984-85 में यह जमीन उनके भाई के नाम विधिवत बंदोबस्त हुई थी और तब से परिवार लगातार उस पर खेती कर रहा है। उन्होंने कहा कि विरोध बेबुनियाद है।

    पुलिस मामले को सलटाने में लगी 

    घटना की सूचना मिलने पर गांडेय थाना के एसआई अमित कुमार चौधरी पुलिस बल और अंचल कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। समाचार लिखे जाने तक गांव के प्रधान की मौजूदगी में ग्रामीणों और मृतक के स्वजनों के बीच वार्ता जारी थी, ताकि बुजुर्ग का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कराया जा सके और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।

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