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    गिरिडीह के चार गांवों में सड़क नहीं बनी, तो ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर शुरू किया श्रमदान

    Updated: Sun, 15 Feb 2026 06:51 PM (IST)

    पीरटांड़ प्रखंड के राजपुरा, अलकोको, बारहगडीह और मेरोमगोड़ा गांवों में सड़क न होने से ग्रामीण परेशान हैं। बीमारों को मुख्य सड़क तक लाने में भारी दिक्कत ...और पढ़ें

    ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर शुरू किया श्रमदान

    ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर शुरू किया श्रमदान

    HighLights

    1. पीरटांड़ के चार गांवों में सड़क न होने से परेशानी।

    2. बीमारों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में होती है दिक्कत।

    3. ग्रामीणों ने चंदा और श्रमदान से सड़क बनाना शुरू किया।

    संवाद सहयोगी,पीरटांड़। पीरटांड़ प्रखंड के बदगांवा पंचायत अंतर्गत ग्राम राजपुरा, अलकोको, बारहगडीह और मेरोमगोड़ा में सड़क निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही। खासकर बीमार लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में काफी दिक्कत होती है। 

    कई बार मरीजों को चारपाई या खाट पर लादकर कच्चे रास्तों से मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। इससे आजीज होकर ग्रामीण सड़क बनाने को चंदा एकत्र कर रहे हैं।

    बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर

    ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। कीचड़ और गड्ढों से भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से मरीजों की जान पर भी बन आती है। कई बार गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को गंभीर हालात में काफी मशक्कत के बाद सड़क तक लाना पड़ा। 

    बार-बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद जब सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने खुद ही श्रमदान और आपसी सहयोग से कच्ची सड़क बनाने का निर्णय लिया। 

    अपने स्तर से रास्ता दुरुस्त करते रहेंगे

    गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर फावड़ा,कुदाल,धामा की मदद से रास्ते को समतल करना शुरू कर दिया है। इसके लिए ग्रामीण आपस में चंदा भी इकट्ठा कर रहे हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से कई बार सड़क निर्माण का आश्वासन मिला, अब तक जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ। उनका कहना है कि जब तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं होता, तब तक वे अपने स्तर से रास्ता दुरुस्त करते रहेंगे। 

    पक्की सड़क निर्माण की स्वीकृति

    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इन गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए पक्की सड़क निर्माण की स्वीकृति दी जाए, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में लोगों को परेशानी न झेलनी पड़े।

    स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में गांव का समुचित विकास संभव नहीं है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस पहल के बाद प्रशासन कब तक संज्ञान लेकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाता है।

    खबरें और भी

    श्रमदान करने वालों में पंचायत समिति सदस्य बिनोद किस्कू,पूर्व पंचायत समिति सदस्य छोटकी देवी,सोनाराम टुडू,सुंदर राम हेंब्रम, नायकी हेंब्रम, ललिता देवी, लीलो किस्कू, सुलामुनी देवी, बिरासमूनी देवी, रासमुनी देवी,सहित अन्य लोग लगे हुए हैं।