विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गोड्डा में मनरेगा कर्मियों का मानदेय 6 महीने से बकाया, होली-ईद फीकी; हड़ताल की चेतावनी

Published: Tue, 03 Mar 2026 01:38 PM (IST)

गोड्डा जिले में मनरेगा कर्मियों का छह माह से अधिक का मानदेय बकाया है, जिससे वे आर्थिक व मानसिक संकट ...और पढ़ें

गोड्डा में मनरेगा कर्मियों का मानदेय 6 महीने से बकाया, होली-ईद फीकी (AI Generated Image)

गोड्डा में मनरेगा कर्मियों का मानदेय 6 महीने से बकाया, होली-ईद फीकी (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, गोड्डा। जिले में मनरेगा योजना को संचालित करने में लगे जिले के ढाई सौ से अधिक मनरेगा कर्मियों का बुरा हाल है। मनरेगा कर्मी मानदेय के अभाव में आर्थिक तंगी के शिकार हो गए हैं। कर्मियों का मानदेय बीते छह माह से बकाया है। ऐसे में मनरेगा कर्मियों की होली व ईद इस बार फीकी रहेगी। हालांकि, पिछले दशहरा में भी कर्मियों को मानदेय नहीं दिया गया था जिसके बाद कर्मियों ने फाकाकशी में दशहरा मनाया था।

कुछ प्रखंड में तो मनरेगा कर्मियों को बीते आठ माह से मानदेय का भुगतान नहीं हो पाया है। पहले तो आवंटन की कमी थी, बाद में ट्रेजरी में तकनीकी समस्या के कारण परेशानी हुई है। अब यह हाल हो गया है कि मनरेगा कर्मी मानदेय के अभाव में मानसिक रूप से भी परेशान हो गए है।

बीते कई सालों से विभाग को अपनी सेवा दे रहे मनरेगा कर्मी आर्थिक तंगी के कारण कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं। बीते दो माह पहले सदर प्रखंड के रोजगार सेवक सुमन कुमार की जान इसलिए नहीं बचाई जा सकी थी कि उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। वे सड़क दुर्घटना के शिकार हो गए थे। चंदा आदि कर मनरेगा कर्मियों ने उनका दाह संस्कार कराया था।

कर्मियों की परेशानी किसी से छिपी नही हैं। जिला म नरेगा कर्मी संघ के पदधारकों ने बताया कि पूरे राज्य भर के कर्मी बीते कई माह से सरकार की नयी व्यवस्था से परेशान हुए हैं तथा अब तो आजिज हो गए हैं। उनके पास आंदोलन करने तथा हड़ताल पर जाने के अलावा अब कोई विकल्प नहीं बचा है।

मनरेगा कर्मियों की 9 से 11 मार्च तक सांकेतिक हड़ताल, 12 मार्च से अनिश्चितकालीन आंदोलन का अल्टीमेटम

राज्य के मनरेगा कर्मचारी पिछले छह माह से अधिक समय से बकाया मानदेय भुगतान, वर्षों से लंबित नियमितीकरण नीति निर्माण, समान वेतन संरचना, सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था एवं मृत मनरेगा कर्मियों के आश्रितों को न्यायसंगत मुआवजा देने की मांग को लेकर दिनांक 9, 10 एवं 11 मार्च 2026 को सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे।

यदि सरकार द्वारा समुचित समाधान नहीं किया गया तो 12 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ कर दिया जाएगा।

संघ के जिला अध्यक्ष मो अकरम ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत मनरेगा कर्मी अत्यंत गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। छह माह से अधिक समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण परिवार का भरण-पोषण कठिन हो गया है। संसाधनों के अभाव में रोजगार सेवक एवं अन्य फील्ड कर्मी कार्यस्थल तक जाने में भी असमर्थ हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त कार्यबोझ थोपा जा रहा है। लगातार बढ़ते कार्यबोझ, लक्ष्य का दबाव, प्रशासनिक तनाव और आर्थिक तंगी के कारण कई कर्मी दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं तथा कुछ ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। राज्य सरकार की ओर से न तो स्वास्थ्य बीमा की समुचित व्यवस्था है और न ही मृत्यु पर मुआवजा नीति।

जिला मंत्री निशी कुमार ने कहा कि वर्ष 2024 की हड़ताल के दौरान हुआ लिखित समझौता आज तक लागू नहीं किया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री के साथ हुई वार्ता में बनी सहमति भी धरातल पर लागू नहीं हुई। साथ ही कहा कि अब तक म नरेगा कर्मियों को नियमित नहीं किया जा सका है। यह प्रमुख मांगो में एक है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।