विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

30000 के कर्ज से खुली कामयाबी की राह, अब दीदियों को आत्मनिर्भर बना रहीं गोड्डा की ज्योति

Published: Mon, 12 Oct 2026 02:46 PM (IST)

गोड्डा की ज्योति प्रिया ने 30 हजार रुपये के कर्ज से फल की दुकान खोलकर पति की मदद की और ...और पढ़ें

गोड्डा की ज्योति प्रिया ने 30 हजार के कर्ज से पाई सफलता, अब ग्रामीण महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

गोड्डा की ज्योति प्रिया ने 30 हजार के कर्ज से पाई सफलता, अब ग्रामीण महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

HighLights

  1. 30 हजार रुपये ऋण से पति के लिए दुकान खोली।

  2. विभागीय परीक्षा पास कर भारतीय स्टेट बैंक की बैंक सखी बनीं।

  3. ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़ रहीं।

विधु विनोद, गोड्डा। कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक पहुंचा देते हैं। गोड्डा जिले की 25 वर्षीय ज्योति प्रिया ने इसे सच कर दिखाया है। जेन जी का प्रतिनिधित्व करने वाली ज्योति आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभरी हैं।

स्वयं सहायता समूह से अपने सफर की शुरुआत करने वाली ज्योति अब भारतीय स्टेट बैंक की बैंक सखी के रूप में ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनने की राह दिखा रही हैं।

ज्योति की सफलता का सफर वर्ष 2020 में शुरू हुआ, जब परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में उनके पति दिनेश कुमार ठाकुर को संघर्ष करते देखा। पति दिहाड़ी मजदूरी करते थे। ऐसे में ज्योति ने गांव के मां भगवती स्वयं सहायता समूह, भलुआ से जुड़ने का निर्णय लिया।

समूह से 30 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने पति को फल की दुकान खुलवाने में मदद की। आज दुकान में फल के साथ पूजा सामग्री भी मिलती है और इससे हर महीने लगभग 10 से 12 हजार रुपये की आय हो रही है।

विभागीय परीक्षा पास कर बनीं बैंक सखी:

समूह से जुड़ने के बाद ज्योति ने स्वरोजगार के साथ अपनी कार्यक्षमता भी विकसित की। मेहरमा के डोय सीएलएफ से जुड़ीं और जनवरी 2024 में बैंक सखी के पद के लिए निकले विज्ञापन को देखकर परीक्षा दी। विभागीय परीक्षा में सफल होने के बाद उनका चयन हुआ।

वर्तमान में वह भारतीय स्टेट बैंक की डोय शाखा में बैंक सखी के रूप में कार्यरत हैं। ज्योति अब महिलाओं के व्यक्तिगत बचत खाते और स्वयं सहायता समूहों के खाते खुलवाने, कैश क्रेडिट लिमिट, ऋण की वापसी, मुद्रा लोन, बीमा और पेंशन संबंधी कार्यों में सहयोग करती हैं।

इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और मंइयां सम्मान योजना से जुड़े डिजिटल कार्य भी करती हैं। जमा-निकासी से लेकर बीमा क्लेम और ऋण आवेदन तक में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।

दीदियों के लिए बनीं प्रेरणा:

ज्योति का कहना है कि पलाश और जेएसएलपीएस के प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर विकास की राह पर आगे बढ़ रही हैं। उनके पति भी स्वरोजगार के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।

ज्योति के कार्यों की डोय सीएलएफ के पदाधिकारी, प्रखंड परियोजना प्रबंधक और एसबीआइ के शाखा प्रबंधक भी सराहना करते हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

  • 30 हजार रुपये: समूह से ऋण लेकर पति के लिए फल की दुकान खुलवाई।
  • वर्ष 2024: विभागीय परीक्षा पास कर बैंक सखी बनीं।
  • वर्ष 2020: मां भगवती स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं।
  • 10 से 12 हजार रुपये: फल और पूजा सामग्री की दुकान से हर महीने होती है आय।

मेहरमा के डोय सीएलएफ से जुड़ी ज्योति प्रिया ने अपने परिश्रम से आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। वह अन्य दीदियों को भी आगे बढ़ने की राह दिखा रही हैं। ऐसी महिलाएं समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। - सोमेश चंद्र प्रकाश, डीपीएम, जेएसएलपीएस

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।