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बांस की खेती से गुमला के किसान होंगे मालामाल, कार्बन क्रेडिट और उत्पादों से बढ़ेगी आय

Published: Tue, 22 Sep 2026 06:27 PM (IST)

गुमला में राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत किसानों को औद्योगिक बांस की खेती के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। ...और पढ़ें

बांस की खेती से गुमला के किसान होंगे मालामाल (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

बांस की खेती से गुमला के किसान होंगे मालामाल (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत 32 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य।

  2. किसानों को औद्योगिक बांस की खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा।

  3. बांस से आय, कार्बन क्रेडिट और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

संतोष कुमार, गुमला। गुमला में बांस अब सिर्फ घर-आंगन और पारंपरिक उपयोग की चीज नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की आय का नया आधार बनने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले में कुल 32 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक बांस की खेती कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें निजी भूमि पर 24 हेक्टेयर और सरकारी भूमि पर आठ हेक्टेयर में बांस लगाया जाएगा। 

किसानों को उन्नत एवं बहुउपयोगी प्रजातियों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बांस को तेजी से तैयार होने वाली घास की प्रजाति माना जाता है, लेकिन इसके बहुउपयोगी गुणों के कारण इसे हरित सोना भी कहा जाता है। 

फर्नीचर, हस्तशिल्प, घरेलू उपयोग की वस्तुओं में इस्तेमाल

फर्नीचर, हस्तशिल्प, घरेलू उपयोग की वस्तुओं से लेकर फाइबर आधारित उत्पादों तक में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में बांस को लकड़ी और प्लास्टिक के विकल्प के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इससे किसानों को खेती के साथ प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित उत्पादों से भी आय का अवसर मिल सकता है। 

बांस की खेती का लाभ केवल आर्थिक नहीं है। तेजी से बढ़ने वाला बांस वातावरण से कार्बन अवशोषित करने में मदद करता है। बांस की खेती से वातावरण में कार्बन अवशोषण बढ़ने के कारण भविष्य में किसान कार्बन क्रेडिट परियोजनाओं से भी अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। 

वैज्ञानिक तरीके से कार्बन अवशोषण का आकलन

हालांकि इसके लिए किसानों को निर्धारित कार्बन परियोजना में शामिल होकर वैज्ञानिक तरीके से कार्बन अवशोषण का आकलन और स्वतंत्र सत्यापन कराना होगा। छोटे किसानों के लिए एफपीओ या परियोजना संचालक के माध्यम से सामूहिक रूप से जुड़ना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। 

बांस के झुरमुट पक्षियों के लिए प्राकृतिक आश्रय बनते हैं।चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है। इसकी पत्तियां पशु चारे के रूप में उपयोग होती हैं, जबकि कोपलों से सब्जी और अचार भी बनाए जाते हैं। इसी उद्देश्य से जिला उद्यान कार्यालय की ओर से किसानों को बांस की औद्योगिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

हाल में 14 किसानों और एक क्षेत्रीय कार्यकर्ता को पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। उद्यान निदेशालय द्वारा नामित रांची की छोटानागपुर क्राफ्ट डेवलपमेंट सोसाइटी के प्रशिक्षकों कीर्तिमान नाथ, अंजीत उरांव और सुकरा उरांव ने किसानों को पौधरोपण, देखभाल, उन्नत प्रजातियों, उपयोग और बाजार की संभावनाओं की जानकारी देने का काम कर रहे हैं।

बांस आधारित उद्योग और उत्पादों की मांग बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत खेती के विस्तार के साथ किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक जोड़ने की दिशा में पहल होने पर गुमला में बांस ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया आधार बनाने का पहल है। - विश्व दीपक कुमार सिंह, तकनीकी विशेषज्ञ, जिला उद्यान कार्यालय गुमला

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