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गुमला में गर्भवती को 2 KM खाट पर बैठाकर ढोने को मजबूर ग्रामीण, आज भी बदहाल है बेन्दवाकोना गांव

Published: Sun, 30 Aug 2026 08:20 PM (IST)Updated: Sun, 30 Aug 2026 08:40 PM (IST)

रायडीह प्रखंड के बेन्दवाकोना गांव में दशकों बाद भी सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।

HighLights

  1. बेन्दवाकोना गांव में सड़क, बिजली, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव।

  2. बीमार महिला को सड़क न होने से खाटी पर 2 किमी ढोया।

  3. ग्रामीणों ने प्रशासन से बुनियादी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने की मांग की।

संवाद सूत्र, रायडीह (गुमला)। आजादी के दशकों बाद भी रायडीह प्रखंड का बेन्दवाकोना गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।

सुरसांग थाना क्षेत्र के कोब्जा पंचायत अंतर्गत राजस्व ग्राम रमजा के बेन्दवाकोना गांव में अब तक सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को आए दिन भुगतना पड़ रहा है।

रविवार को गांव निवासी 24 वर्षीय बृंदावती देवी, पति गणेश सिंह, की अचानक तबीयत बिगड़ गई। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को उन्हें खाटी में बैठाकर करीब दो किलोमीटर तक पैदल ढोकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ा।

इसके बाद निजी वाहन से उन्हें सदर अस्पताल गुमला ले जाया गया। मरीज को खाटी में ढोकर ले जाने का दृश्य गांव में व्याप्त बदहाली की तस्वीर सामने लाता है।

ग्रामीण ब्रजनाथ सिंह ने बताया कि बेन्दवाकोना के लोग आज भी सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। बिजली की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रात में डिबरी के सहारे रहना पड़ता है।

वहीं, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण डाड़ी-चुआं का पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि गांव में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उसे खाटी या गेडुवा भार में बैठाकर करीब दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

बरसात में बढ़ जाती है परेशानी

इसके बाद ही वाहन से मरीज को अस्पताल ले जाना संभव होता है। बरसात के दिनों में कच्चे रास्ते के कारण ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है।

ब्रजनाथ सिंह के अनुसार गांव की समस्याओं से कई बार जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव तक पक्की सड़क, बिजली एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को खाटी में ढोकर ले जाने की मजबूरी खत्म हो।

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