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    गुमला में मूंगफली की खेती को बढ़ावा: 800 हेक्टेयर में पहली बार होगी खेती, 600 क्विंटल बीज का होगा वितरण

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    राष्ट्रीय तिलहन मिशन के तहत गुमला जिले में पहली बार 800 हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को 600 क्विंटल प्र ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. 800 हेक्टेयर में पहली बार मूंगफली की खेती।

    2. किसानों को 600 क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण।

    3. राष्ट्रीय तिलहन मिशन के तहत आय वृद्धि का लक्ष्य।

    जागरण संवाददाता, गुमला। राष्ट्रीय तिलहन मिशन के तहत गुमला जिले में वर्ष 2026-27 के खरीफ मौसम में पहली बार बड़े पैमाने पर मूंगफली की खेती को बढ़ावा देने के लिए 800 हेक्टेयर भूमि पर क्लस्टर प्रदर्शन किया जाएगा।

    इसके लिए किसानों के बीच कुल 600 क्विंटल प्रमाणित मूंगफली बीज का वितरण किया जा रहा है। कृषि विभाग ने सभी 12 प्रखंडों के लिए पंचायतवार लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। योजना के अनुसार जिले की 159 पंचायतों में चयनित किसानों के माध्यम से मूंगफली की खेती कराई जाएगी।

    बीज की आपूर्ति 30 किलोग्राम के बैग में की जाएगी। प्रथम खेप की आपूर्ति 5 जुलाई से शुरू कर दी गई है, ताकि समय पर किसानों के बीच बीज का वितरण कर बुवाई सुनिश्चित की जा सके। प्रखंडवार लक्ष्य में पालकोट को सर्वाधिक 113 हेक्टेयर क्षेत्र और 84.75 क्विंटल बीज आवंटित किया गया है।

    इसके लिए 282.5 बैग उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद कामडारा में 105 हेक्टेयर, घाघरा में 102 हेक्टेयर, बसिया में 100 हेक्टेयर, गुमला में 94 हेक्टेयर तथा रायडीह में 90 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    वहीं डुमरी में 58 हेक्टेयर, चैनपुर एवं जारी में 24-24 हेक्टेयर तथा सिसई, भरनो और बिशुनपुर में 30-30 हेक्टेयर में मूंगफली की खेती कराई जाएगी। योजना के तहत कुल 2,000 बैग बीज किसानों के बीच वितरित किए जाएंगे।

    कृषि विभाग का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की परिस्थितियों में मूंगफली किसानों के लिए नकदी फसल का बेहतर विकल्प बन सकती है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जिले में तिलहन उत्पादन को भी नई गति मिलेगी।

    विभागीय अधिकारियों ने बताया कि क्लस्टर आधारित खेती से किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और वैज्ञानिक सलाह का लाभ मिलेगा। सफल प्रदर्शन के बाद आगामी वर्षों में जिले में मूंगफली का रकबा और बढ़ाने की योजना है। इससे तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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