नेता नहीं, चौपारण का सबसे चर्चित चेहरा बना यह बंदर! स्कूल से रथयात्रा तक... हर जगह देता है हाजिरी
चौपारण में एक अनोखा बंदर पिछले छह माह से इंसानी भीड़ का हिस्सा बना हुआ है, जो स्कूल से लेकर रथयात्रा तक हर जगह मौजूद रहता है। वन विभाग द्वारा 50 किमी ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।
HighLights
चौपारण में छह माह से इंसानों के बीच रह रहा बंदर।
स्कूल, बाजार, रथयात्रा जैसे हर आयोजन में रहता मौजूद।
शशि शेखर, चौपारण (हजारीबाग)। चौपारण में इन दिनों कोई नेता, अधिकारी या सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि एक अकेला बंदर लोगों के बीच सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले करीब छह माह से यह बंदर शहर और आसपास के इलाकों में लगातार दिखाई दे रहा है। इसकी सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे जंगल की एकांत जिंदगी नहीं, बल्कि इंसानों की भीड़ पसंद है।
सुबह स्कूल की प्रार्थना सभा हो, दोपहर का व्यस्त बाजार, प्रखंड मुख्यालय का परिसर, खेल मैदान में चल रहा मैच या फिर हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी वाला धार्मिक आयोजन- यह बंदर हर जगह बेखौफ पहुंच जाता है। लोगों के बीच बैठना, इधर-उधर घूमना और उनकी गतिविधियों को उत्सुकता से देखना इसकी आदत बन गई है।
हाल ही में आयोजित श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव में भी यह बंदर पूरे समय श्रद्धालुओं के बीच नजर आया। आरती के दौरान भी उसकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी साझा कीं।
अमौली अपूर्व उच्च विद्यालय में यह बंदर कई दिनों से नियमित रूप से प्रार्थना सभा के समय पहुंच रहा था। क्लासरुम में भी पढाई करते बच्चों के बीच बैठ जाता था। छात्र-छात्राएं इसे स्कूल का 'अनौपचारिक छात्र' कहकर पुकारने लगे। बाजार में भी यह दुकानों और ग्राहकों के बीच आराम से घूमता दिखाई देता है।
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वन विभाग के लिए भी यह बंदर पहेली बन गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इसे कई बार पकड़कर लगभग 50 किलोमीटर दूर जंगल में छोड़ा गया, लेकिन हर बार यह वापस चौपारण लौट आया। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह मानव बस्तियों का अभ्यस्त हो चुका है।
जानकारों का कहना है कि चौपारण के जंगलों में सामान्यतः बंदरों की आबादी नहीं है। ऐसे में यह बंदर स्थानीय जंगल से नहीं आया माना जा रहा है। यह कहां से आया और आखिर इंसानी भीड़ के बीच रहना इसे इतना क्यों पसंद है, इसका स्पष्ट उत्तर फिलहाल किसी के पास नहीं है।
हालांकि यह बंदर अधिकांश समय शांत रहता है, लेकिन कुछ मौकों पर लोगों द्वारा छेड़ने या घेरने पर आक्रामक भी हो चुका है। इसलिए वन विभाग लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और इसे भोजन देने या परेशान नहीं करने की अपील करता रहा है।