यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Hazaribagh News: जिस दिन छपकर आना था शादी का कार्ड, उसी दिन निकली कैप्टन करमजीत की अंतिम यात्रा
जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में आइईडी ब्लास्ट में बलिदान हुए कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी का हजारीबाग में अंतिम संस्कार किया गया। जिस दिन कैप्टन के घर मे ...और पढ़ें

HighLights
- जम्मू से पहुंचा मंगेतर का पूरा परिवार, चिता की अग्नि में समर्पित कर दिए गए शादी के कपड़े
- नम आंखों से दी गई कैप्टन करमजीत सिंह को विदाई, परिवार के साथ खड़ा रहा हजारीबाग
- अंतिम विदाई के बाद कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी के कपड़े और तिरंगा माता पिता को सौंपे गए
विकास कुमार, हजारीबाग। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी की अंतिम यात्रा में हर किसी की आंखें नम थीं। पीड़ा इस बात की थी कि हजारीबाग के जिस बेटे की 6 अप्रैल से शादी की तैयारी हो रही थी, उसी बेटे को अंतिम विदाई दी जा रही थी। कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी की शहादत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।
शादी की तैयारियों के बीच कैप्टन बलिदान
इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि जिस दिन कैप्टन की शादी का कार्ड छपकर आने वाला था, उसी दिन घर पर उनका तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पड़ा था।
उन्होंने स्वयं ही अपनी शादी की तैयारियों को लेकर सबकुछ तय किया था। स्वयं 10 दिन हजारीबाग में रहकर अपने नाते-रिश्तेदारों को जम्मू आने के लिए आमंत्रित कर गए थे।
जम्मू से पहुंचा मंगेतर का परिवार
दूसरी तरफ सेना में मेडिकल ऑफिसर व उनकी मंगेतर का पूरा परिवार भी जम्मू से हजारीबाग पहुंचा था। मुक्तिधाम में वे अपने पूरे परिवार के साथ मौजूद थीं।
जब करमजीत सिंह के शादी के लिए तैयार किए गए कपड़े उनकी चिता की अग्नि में समर्पित कर दिए गए तो यह दृश्य देख हर कोई रो पड़ा। कैप्टन के शादी के कपड़े जब आग को समर्पित किए जा रहे थे, उसी समय कैप्टन के कपड़े और तिरंगा माता-पिता को सौंपा गया।

कैप्टन के कपड़े और तिरंगा माता पिता को सौंपे गए।
सभी ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई
मुक्तिधाम में उनकी मां नीलू बख्शी अपने बेटे के पार्थिव शरीर को टकटकी लगाकर देख रही थीं, लोग उन्हें संभालने में लगे थे। सेना के साथियों के गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद जब उनकी चिता को आग दी गई तो वहां मौजूद लोग अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए।
आग देने के बाद पिता अजिंदर सिंह अपने बेटे की तस्वीर को देखते रहे। पूरे हजारीबाग ने अपने वीर बेटे को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। नगरवासियों ने कहा कि करमजीत की शहादत को कभी भुलाया नहीं जाएगा। परिवार के दुख में पूरा हजारीबाग साथ खड़ा है।
खबरें और भी
2019 में ज्वाइन से की सेना
मालूम हो कि कमरजीत सिंह बख्शी ने 2019 में सेना ज्वाइन की थी। जम्मू के अखनूर सेक्टर पेट्रोलिंग के दौरान आतंकियों के द्वारा बिछाए आइइडी ब्लास्ट में 11 फरवरी को वे शहीद हो गए थे।
जुलू पार्क में उमड़ा लोगों का हुजूम
देश के लिए शहीद होने वाले कैप्टन करमजीत सिंह की अंतिम विदाई को लेकर सुबह से जुलू पार्क स्थित उनके आवास पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। भारी भीड़ की वजह से पुलिस को जुलू पार्क के मार्ग को वन वे करना पड़ा।
यहां पर सेना सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर लेकर सुबह करीब 9 बजे पहुंची थी। इसके बाद यहां से फिर उन्हें गुरुद्वारा ले जाया गया। इसके बाद फिर मुक्तिधाम के लिए यात्रा निकली।
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