भोले के दरबार में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, 'हर-हर महादेव' के जयघोष से शिवमय हुआ हजारीबाग
सावन की पहली सोमवारी पर हजारीबाग शिवमय हो गया, जहां श्रद्धालुओं ने सुबह से ही मंदिरों में जलाभिषेक किया। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा वाताव ...और पढ़ें

हजारीबाग में सावन की पहली सोमवारी पर शिवमय हुआ माहौल। जागरण
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हजारीबाग में सावन की पहली सोमवारी पर शिवमय हुआ माहौल।
श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ से मांगी मन्नतें।
विनय कुशवाहा, हजारीबाग। सावन की पहली सोमवारी पर सोमवार को हजारीबाग पूरी तरह शिवमय हो गया। भोर की पहली किरण के साथ ही मंदिरों के घंटे-घड़ियाल गूंजने लगे और हर-हर महादेव व बोल बम' के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, दूध और पुष्प लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें सुबह से ही शिवालयों के बाहर नजर आईं।
महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, युवाओं ने उज्ज्वल भविष्य और बुजुर्गों ने समाज में सुख-शांति की कामना करते हुए भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।
हजारीबाग शहर के प्राचीन बुढ़वा महादेव मंदिर, झील परिसर स्थित बुढ़वा महादेव, पगमल रोड शिव मंदिर, कोर्रा, ओकनी, कानीबाजार, मटवारी, बड़ा शिव मंदिर सहित सभी प्रमुख शिवालयों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, भजन-कीर्तन और विशेष आरती का आयोजन किया गया।
मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं को कतारबद्ध दर्शन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी सावन की पहली सोमवारी का उत्साह चरम पर रहा। प्राचीन बुढ़वा महादेव मंदिर में अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। वहीं प्रसिद्ध बुढ़िया माता मंदिर में माता के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का जलाभिषेक कर मनोकामनाएं मांगीं। चंपेश्वरी धाम में भी दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
इसके अलावा बरकट्ठा, बरही, चौपारण, विष्णुगढ़, कटकमदाग, कटकमसांडी, दारू, टाटीझरिया, केरेडारी, बड़कागांव, चुरचू, पदमा और सदर प्रखंड के दर्जनों शिवालयों में सुबह से शाम तक जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा। कांवरियों के जत्थे 'बोल बम' के जयघोष के साथ मंदिरों तक पहुंचे और विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की।
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श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मंदिर समितियों ने पेयजल, साफ-सफाई, बैरिकेडिंग और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की थी। प्रमुख मंदिरों में चिकित्सा सहायता और सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन हुआ, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।