17 साल में भी पूरा नहीं हुआ अल्पसंख्यक छात्रावास, हजारीबाग में 1 करोड़ का भवन अब बना खंडहर
हजारीबाग में गरीब और अल्पसंख्यक बच्चों के लिए बना छात्रावास 17 साल बाद भी अधूरा है, जिससे एक करोड़ रुपये ...और पढ़ें

हजारीबाग में अल्पसंख्यक छात्रावास 17 साल से अधूरा।
HighLights
हजारीबाग में अल्पसंख्यक छात्रावास 17 साल से अधूरा।
एक करोड़ की लागत से बना भवन खंडहर में बदला।
विनय कुशवाहा, हजारीबाग। शहर के खिरगांव बस स्टैंड के समीप गरीब और अल्पसंख्यक बच्चों के लिए बनाया जा रहा छात्रावास 17 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल की ओर से कराया जा रहा दो मंजिला भवन निर्माण के बाद भी उपयोग में नहीं आ सका।
भवन का ढांचा तैयार होने के बाद केवल प्लास्टर और फिनिशिंग का काम बाकी था, लेकिन इसके बाद दोबारा काम शुरू नहीं हुआ। वर्षों से उपेक्षित भवन अब पूरी तरह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण की राशि की निकासी कर ली गई, जबकि भवन का काम अधूरा छोड़ दिया गया। हालांकि राशि निकासी और मिलीभगत के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद जिस उद्देश्य से छात्रावास बनाया जा रहा था, वह आज तक पूरा नहीं हो सका। गरीब और जरूरतमंद बच्चों को रहने और पढ़ाई की सुविधा देने की योजना विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई।
वर्ष 2009 के आसपास शुरू हुआ यह निर्माण अब 17 वर्ष का समय पूरा कर चुका है। भवन लंबे समय तक बंद और अनुपयोगी रहने के कारण जर्जर हो गया है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्लास्टर और फिनिशिंग का काम पूरा कर भवन को चालू कर दिया जाता तो कई गरीब विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलता। लेकिन न तो अधूरे काम को पूरा कराने की पहल हुई और न ही भवन की मरम्मत की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।
सांसद-विधायक ने भी नहीं उठाई आवाज
स्थानीय लोगों के अनुसार इतने वर्षों से भवन अधूरा और जर्जर पड़ा है, लेकिन अब तक किसी सांसद, विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि ने इस मामले को प्रमुखता से नहीं उठाया। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक भवन के अधूरे रहने का मामला नहीं है, बल्कि गरीब बच्चों के भविष्य से जुड़ी योजना की अनदेखी का मामला है।
अधिकारी बोले- कुछ दिन पहले ही पदस्थापित हुआ हूं
इस संबंध में ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता सूरज प्रकाश चौधरी से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस भवन के संबंध में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही उनकी यहां पदस्थापना हुई है।
राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 17 साल तक सरकारी भवन का अधूरा पड़ा रहना गंभीर मामला है। इसकी जांच होनी चाहिए और भवन को जल्द उपयोग लायक बनाया जाना चाहिए। अफजल ने कहा कि छात्रावास गरीब और अल्पसंख्यक बच्चों के लिए बनाया जा रहा था। भवन तैयार होने के बाद भी बच्चों को इसका लाभ नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
इसके अलावा मोहम्मद जुबेर ने कहा कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद भवन खंडहर बन गया। जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। जुबेर खान ने कहा कि इतने वर्षों तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने भवन की सुध नहीं ली। सरकार को मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
अमजद खान ने कहा कि छात्रावास चालू होता तो आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ाई और रहने में बड़ी सुविधा मिलती। अधूरा भवन सरकारी व्यवस्था की उदासीनता को दर्शाता है।
