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36 वार्ड, साढ़े तीन लाख आबादी और सिर्फ 3 फॉगिंग मशीन! हजारीबाग में मच्छरों का बढ़ा आतंक

Published: Mon, 24 Aug 2026 09:09 AM (IST)

हजारीबाग में नगर निगम के पास सिर्फ तीन फागिंग मशीनें होने के कारण 36 वार्डों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ ...और पढ़ें

हजारीबाग में 36 वार्डों के लिए सिर्फ तीन फागिंग मशीनें।

हजारीबाग में 36 वार्डों के लिए सिर्फ तीन फागिंग मशीनें।

रमण कुमार, हजारीबाग। बारिश का मौसम आने के साथ ही शहर में मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है, लेकिन नगर निगम प्रशासन के पास इनसे निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। नगर निगम क्षेत्र के 36 वार्डों में करीब साढ़े तीन लाख की आबादी रहती है। इतनी बड़ी आबादी को मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए निगम के पास वर्तमान में महज तीन फागिंग मशीन उपलब्ध हैं।

ऐसे में सभी वार्डों में नियमित फागिंग कराना मुश्किल बना हुआ है। जानकारों की माने तो निगम प्रशासन वीआईपी एरिया में फागिंग कराने में ही ज्यादा दिलचस्पी रखता है। यही कारण है कि बारिश का मौसम आते ही क्षेत्र में मलेरिया, डेंगू के मरीज बढ़ने लगे हैं।

बोर्ड बैठक में प्रस्ताव, अब तक नहीं हुई खरीद

बताते चलें कि मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से लोगों को बचाने और सीमित संसाधनों को देखते हुए नगर निगम बोर्ड की बैठकों में कई बार नई फागिंग मशीनों की खरीद का प्रस्ताव लाया जा चुका है। बावजूद इसके प्रस्ताव अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। सवाल उठता है कि जब निगम को अपनी जरूरत का पता है तो मशीनों की खरीद में आखिर देरी क्यों हो रही है।

जल जमाव और कचरे के ढेर बने मच्छरों के ठिकाने

नगर निगम क्षेत्र में जगह-जगह जल जमाव, खुली नालियां और कचरे के ढेर मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं। बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई इलाकों में जल जमाव लंबे समय तक रहने के कारण मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नियमित फागिंग नहीं होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों की माने तो मच्छर डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया सहित कई संक्रामक बीमारियों के वाहक हैं। इसके बावजूद मच्छर नियंत्रण को लेकर व्यवस्था प्रभावी नजर नहीं आ रही है। तीन मशीनों के सहारे 36 वार्डों में फागिंग का दावा महज औपचारिकता बनकर रह गया है। शहरवासियों का कहना है कि फागिंग केवल शिकायत के बाद नहीं, बल्कि संवेदनशील इलाकों में नियमित रूप से होनी चाहिए।

जागरूकता रैली से पूरी कर ली औपचारिकता

विगत दिनों विश्व मच्छर दिवस पर जिला वेक्टर बार्न डिजीज कार्यालय की ओर से जागरूकता रैली निकालकर अभियान की औपचारिकता पूरी कर ली गई। जबकि विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही बारिश के दो माह में करीब 38 मरीज मिले हैं, वहीं निजी अस्पतालों के मरीजों की गणना करने पर यह संख्या दो सौ से ज्यादा हो जाती है।

अब सवाल यह है कि जागरूकता रैली के साथ जमीनी स्तर पर मच्छर नियंत्रण की ठोस व्यवस्था कब होगी। शहरवासियों ने जिला वीबीडी कार्यालय से नियमित तौर पर डीडीटी सहित अन्य कीटनाशकों का छिड़काव करने की मांग की है।

शहर में बढ़ते मच्छरों को लेकर दैनिक जागरण ने लोगों से बात की। प्रस्तुत है उसके प्रमुख अंश ......

बरसात शुरू होते ही मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है। शाम होते ही घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। नगर निगम को नियमित फॉगिंग और कीटनाशक दवा का छिड़काव कराना चाहिए, ताकि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा कम हो।

-नीरज कुमार, समाजसेवी।

मच्छरों की बढ़ती संख्या से बच्चों और बुजुर्गों को लेकर चिंता बनी हुई है। जगह-जगह जल जमाव और गंदगी के कारण स्थिति और खराब हो रही है। सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ मच्छररोधी अभियान चलाने की जरूरत है।

-सच्चिदानंद पांडेय, समाजसेवी।

सिर्फ बीमारी फैलने के बाद इलाज कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। मच्छरों के पनपने वाले स्थानों को चिन्हित कर तत्काल पानी निकासी और कीटनाशक का छिड़काव कराया जाना चाहिए। प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखानी होगी।

-विजय केसरी, व्यवसायी

हर साल बरसात में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का डर लोगों को सताता है। यदि समय रहते नालियों की सफाई, जल जमाव हटाने और नियमित फॉगिंग की व्यवस्था हो, तो काफी हद तक बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।

-धीरज कुमार, व्यवसायी।