हजारीबाग के सरकारी स्कूलों में वज्रपात का खतरा, बिना तड़ित चालक के चल रहीं क्लासेस
हजारीबाग के 85% सरकारी विद्यालयों में तड़ित चालक नहीं हैं, जिससे मानसून में 2 लाख से अधिक छात्रों की सुरक्षा खतरे में है। 2012-13 की योजना के उपकरण चो ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
हजारीबाग के 85% सरकारी स्कूलों में तड़ित चालक नहीं।
दो लाख से अधिक छात्र-छात्राओं की सुरक्षा खतरे में।
2012-13 की योजना के उपकरण रखरखाव के अभाव में बेकार।
संदीप कुमार सिन्हा, हजारीबाग। मानसून के मौसम में लगातार बढ़ रही वज्रपात की घटनाओं के बीच हजारीबाग जिले के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के करीब 85 प्रतिशत सरकारी विद्यालयों में अब तक तड़ित चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) की व्यवस्था नहीं है।
ऐसे में दो लाख से अधिक छात्र-छात्राओं और हजारों शिक्षकों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, जिले में प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तक कुल 1,485 सरकारी विद्यालय संचालित हैं। इनमें से मात्र करीब 14 प्रतिशत विद्यालयों में ही तड़ित चालक मौजूद हैं।
शेष विद्यालयों में आकाशीय बिजली से बचाव के लिए कोई प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। बरसात के दिनों में जब बिजली चमकने और वज्रपात की घटनाएं बढ़ जाती हैं, तब इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा चिंता का विषय बन जाती है।
2012-13 में शुरू हुई थी योजना, रखरखाव के अभाव में बेकार हुए उपकरण
सरकारी विद्यालयों को वज्रपात से सुरक्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 2012-13 में तड़ित चालक लगाने की योजना शुरू की गई थी। इसके तहत विद्यालय प्रबंधन समितियों को प्रति विद्यालय करीब 34 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी।
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उस समय बड़ी संख्या में विद्यालयों में तड़ित चालक लगाए गए थे, लेकिन समय के साथ इन उपकरणों की देखरेख नहीं हो सकी। कई विद्यालयों में लगे तड़ित चालक चोरी हो गए, जबकि कई जगह रखरखाव के अभाव में खराब होकर निष्क्रिय हो चुके हैं। इसके बाद विभाग की ओर से न तो पुराने उपकरणों की जांच कराई गई और न ही खराब तड़ित चालकों को बदलने की कोई व्यापक पहल हुई।
हजारीबाग वज्रपात की दृष्टि से संवेदनशील जिला
भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हजारीबाग जिला वज्रपात की घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। छोटानागपुर पठार क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। हर साल वज्रपात से लोगों और मवेशियों की जान जाने की घटनाएं होती हैं।
ऐसे में विद्यालयों में तड़ित चालक की अनुपलब्धता किसी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में जहां भवनों के आसपास खुले मैदान, पेड़ और ऊंचे स्थान होते हैं, वहां खतरा और अधिक रहता है।
शिक्षकों और अभिभावकों ने उठाई मांग
विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मानसून शुरू होने से पहले सभी विद्यालयों में तड़ित चालक की जांच और आवश्यकतानुसार नए उपकरण लगाए जाने चाहिए। खराब पड़े तड़ित चालकों की मरम्मत भी तत्काल कराई जानी चाहिए।
अभिभावकों ने भी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि वज्रपात के खतरे को देखते हुए सभी सरकारी विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की जाए। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार और विभाग की जिम्मेदारी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च नहीं, खतरे का इंतजार?
सरकारी विद्यालयों में तड़ित चालक जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। एक ओर सरकार विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है।
वहीं, दूसरी ओर प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम वर्षों से लंबित हैं। अब मानसून के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या शिक्षा विभाग किसी अप्रिय घटना के बाद ही जागेगा या समय रहते विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा।
अधिकांश विद्यालयों में स्थापित तड़ित चालक चोरी हो चुके हैं। विद्यालयों में पुनः तड़ित चालक की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड से वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। -आकाश कुमार, अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, हजारीबाग