₹200000 लोन लेकर कंचन देवी ने शुरू किया प्रिंटिंग प्रेस का बिजनेस, अब हर महीने कमा रहीं 15-20 हजार रुपए
हजारीबाग की कंचन देवी ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। 2018 में सखी मंडल से जुड़कर उन ...और पढ़ें


समय कम है?
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मासूम अहमद, हजारीबाग। कभी आर्थिक तंगी और घरेलू जिम्मेदारियों से जूझने वाली ग्राम दरिया, प्रखंड ईचाक की कंचन देवी ने आत्मनिर्भरता का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़कर इन्होंने वर्तमान में न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनते हुए परिवार का सहारा बनी बल्कि उनकी सहायता से कई अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ दिया।
आज हालत यह है कि कंचन देवी हर महीने 15 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर अपने परिवार का मजबूत सहारा बन गई हैं। उनकी सफलता की कहानी की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई जब गांव में सखी मंडल के गठन के दौरान कंचन देवी ने स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ने का निर्णय लिया।
समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की और बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें सखी मंडल, ग्राम संगठन (वीओ) तथा संकुल संगठन (सीएलएफ) में अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए कंचन देवी ने विभिन्न योजनाओं का लाभ लिया। इस क्रम में इन्होंने सीआईएफ के माध्यम से दो लाख का ऋण, पीएमईजीपी योजना के तहत बैंक लोन आदि के सहयोग से गांव में कॉपी प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी व्यवसाय की शुरुआत की।
कंचन देवी ने अपने व्यवसाय का प्रचार स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), ग्राम संगठन (वीओ) और सीएलएफ नेटवर्क के माध्यम से किया। धीरे-धीरे उनका काम बढ़ता गया और आसपास के क्षेत्रों में उनकी पहचान बन गई। आज उनका व्यवसाय स्थिर आय का स्रोत बन चुका है।
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भविष्य की योजना
कंचन देवी ने कॉपी प्रिंटिंग व्यवसाय का विस्तार रामगढ़, चतरा और कोडरमा जैसे जिलों में करते हुए आपूर्ति शुरू करना चाहती हैं। साथ ही नई कॉपी कवर प्रिंटिंग मशीन की स्थापना भी करना चाहती हैं।
वह कहती हैं कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। आज मैं आत्मनिर्भर हूँ और इसका श्रेय जेएसएलपीएस को जाता है।
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