झारखंड-ओडिशा कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार: बुड़ामारा-चाकुलिया विशेष रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा
बुड़ामारा-चाकुलिया विशेष रेल लाइन परियोजना के लिए पूर्वी सिंहभूम में भूमि अधिग्रहण पूरा हो गया है, जिससे निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द ...और पढ़ें

किसानों और रैयतों की आपत्तियों पर सुनवाई पूरी होने के बाद सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने यह अंतिम फैसला लिया है।
HighLights
बुड़ामारा-चाकुलिया रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा हुआ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ड्रीम प्रोजेक्ट है यह।
झारखंड-ओडिशा में बढ़ेगी कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास होगा।
जागरण संवादाता, जमशेदपुर। बहुप्रतीक्षित बुड़ामारा-चाकुलिया विशेष रेल लाइन परियोजना के निर्माण की सबसे बड़ी बाधा आखिरकार दूर हो गई है।
रेल मंत्रालय के अधीन दक्षिण-पूर्व रेलवे (निर्माण संगठन) ने पूर्वी सिंहभूम जिले में पड़ने वाली भूमि के अधिग्रहण की अंतिम गजट अधिसूचना जारी कर दी है।
इसके साथ ही इस क्षेत्र की चिह्नित जमीन अब पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन हो गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार, इस अधिग्रहित भूमि पर अब किसी भी प्रकार का दावा या अतिक्रमण मान्य नहीं होगा।
59.96 किलोमीटर लंबी है परियोजना
कुल 59.96 किलोमीटर लंबी इस अंतरराज्यीय ब्राडगेज रेल परियोजना का 39.70 किलोमीटर का बड़ा हिस्सा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले से होकर गुजरेगा।
भारत के राजपत्र (गजट) के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा अंचल के अंतर्गत आने वाले बोरोल, सियालबिंदा, जाड़ापाल और सिरबई गांव (मौजा) की जमीन का अधिग्रहण प्रक्रियाबद्ध तरीके से पूरा कर लिया गया है।
किसानों और रैयतों की आपत्तियों पर सुनवाई पूरी होने के बाद सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने यह अंतिम फैसला लिया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ड्रीम प्रोजेक्ट
लगभग 1,639 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास स्वयं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। यह परियोजना राष्ट्रपति का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाती है।
मयूरभंज (ओडिशा) को पूर्वी सिंहभूम (झारखंड) से सीधे जोड़ने वाली यह नई रेल लाइन आदिवासी बहुल इलाके में न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास के नए द्वार खोलेगी।
सुगम यातायात और आर्थिक विकास
इस नई रेल लाइन के शुरू होने से झारखंड और ओडिशा के बीच माल ढुलाई व यात्री यातायात बेहद सुगम हो जाएगा। साथ ही, यह परियोजना टाटानगर और खड़गपुर से ओडिशा जाने के लिए एक छोटा और सीधा मार्ग प्रदान करेगी।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही दक्षिण-पूर्व रेलवे जल्द ही पटरियां बिछाने और सिविल निर्माण का कार्य शुरू करेगा, जिससे स्थानीय लोगों का वर्षों पुराना सपना जल्द साकार होता दिखेगा।