ऑपरेशन एलिफेंट: हाथियों की घुसपैठ रोकने को सरडीहा से दक्षिणसोल तक खोदी जा रही 20 किमी लंबी ट्रेंच
चाकुलिया वन क्षेत्र में हाथियों के बढ़ते उपद्रव को रोकने के लिए वन विभाग ने पश्चिम बंगाल सीमा पर 20 किलोमीटर लंबी खाई खोदना शुरू किया है। सरडीहा से दक ...और पढ़ें

हाथियों के आक्रमण से बचाने के लिए की जा रही लंबी ट्रेंच (गहरी खाई) की खुदाई।
संवाद सूत्र चाकुलिया । चाकुलिया वन क्षेत्र में जंगली हाथियों के लगातार बढ़ते उपद्रव और जान-माल के नुकसान को देखते हुए वन विभाग ने एक बड़ी घेराबंदी शुरू की है। हाथियों की झारखंड में अनियंत्रित घुसपैठ रोकने के लिए पश्चिम बंगाल सीमा से सटे सरडीहा बॉर्डर पर लगभग 20 किलोमीटर लंबी ट्रेंच (गहरी खाई) की खुदाई की जा रही है।
जेसीबी से हो रही खुदाई, वैज्ञानिक तरीका अपनाया
पिछले दो दिनों से युद्धस्तर पर जेसीबी मशीनों के जरिए ट्रेंच खोदने का काम जारी है। विभाग इस बार खुदाई के लिए विशेष तकनीक का उपयोग कर रहा है।
ट्रेंच को ऊपर से चौड़ा और नीचे से संकरा बनाया जा रहा है, ताकि हाथी इसे पार न कर सकें। यह ट्रेंच सरडीहा से शुरू होकर बंगाल सीमा से सटे दक्षिणसोल, पाकुड़िया और मोराबांधी जैसे संवेदनशील इलाकों तक जाएगी।
हाथियों के लिए बनेगा 'फिक्स्ड रूट'
वन विभाग के इस प्रयोग के पीछे मुख्य उद्देश्य हाथियों की आवाजाही को एक निश्चित मार्ग (कॉर्डोर) तक सीमित करना है। वर्तमान में, हाथी जंगलों के रास्ते किसी भी गांव में घुस जाते हैं, जिससे ग्रामीणों की फसलों और घरों को भारी नुकसान पहुंचता है।
ट्रेंच बन जाने से हाथियों के पास झारखंड में प्रवेश के लिए केवल चुनिंदा रास्ते बचेंगे, जिससे वन विभाग की टीमें उनकी लोकेशन पर आसानी से नजर रख सकेंगी और उन्हें रिहायशी इलाकों में जाने से पहले ही रोका जा सकेगा।
पूर्व के प्रयोगों से मिली प्रेरणा
यह पहली बार नहीं है जब चाकुलिया में ट्रेंच का सहारा लिया गया है। इससे पहले लोधाशोली पंचायत के अमलागोड़ा-नीमपुरा में बंगाल सीमा के पास सड़क किनारे लंबी दूरी तक ट्रेंच खोदी गई थी। उस प्रयोग की सफलता को देखते हुए अब इसे बड़े पैमाने पर विस्तारित किया जा रहा है।
वन विभाग को उम्मीद है कि इस 20 किलोमीटर लंबी खाई से चाकुलिया प्रखंड के दर्जनों गांवों को हाथियों के आतंक से स्थाई राहत मिलेगी। इससे लोगों को हाथियों के आक्रमण से राहत मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल से झारखंड में हाथियों का प्रवेश मुख्य रूप से इसी इलाके से हो रहा है। हाथियों के अनियंत्रित प्रवेश को रोकने तथा उन्हें एक निश्चित मार्ग प्रदान करने के लिए लगभग 20 किलोमीटर लंबा ट्रेंच खोदा जा रहा है।
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दिग्विजय सिंह, रेंजर, चाकुलिया।