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    यहां गायों को गोद लेते हैं कारोबारी: चाकुलिया की गौशाला में 500 व्यवसायियों ने पेश की सेवा की अनूठी मिसाल

    Updated: Sun, 10 May 2026 09:53 PM (IST)

    चाकुलिया की गोलोक धाम गौशाला में गोवंश को गोद लेने का अभियान चल रहा है, जिसमें जमशेदपुर के 500 से अधिक व्यवसायियों ने गो-सेवा का संकल्प लिया है। यह गौ ...और पढ़ें

    चाकुलिया स्थित गोलोक धाम गौशाला में आयोजित कार्यक्रम में दैनिक जागरण अखबार पढ़तीं युवतियां।

    चाकुलिया स्थित गोलोक धाम गौशाला में आयोजित कार्यक्रम में दैनिक जागरण अखबार पढ़तीं युवतियां।

    HighLights

    1. जमशेदपुर के 500 व्यवसायी गो-सेवा से जुड़े।

    2. चाकुलिया गौशाला में 23,000 से अधिक गोवंश।

    3. बीएसएफ द्वारा बचाए गए गोवंश को आश्रय।

    संसू, चाकुलिया। चाकुलिया स्थित गोलोक धाम गौशाला में गोवंश की सेवा और संरक्षण की मिसाल पेश की जा रही है। यहां गायों को गोद लेने का चलन व्यवसायियों के बीच आंदोलन का रूप ले चुका है। 
     
    अब तक हजारों कारोबारी यहां गोवंश को गोद लेकर उनकी देखभाल और जीवनभर के खर्च का संकल्प ले चुके हैं। इसी कड़ी में रविवार को जमशेदपुर के 500 से अधिक छोटे-बड़े व्यवसायियों ने गौशाला का भ्रमण किया और गो-सेवा के इस महायज्ञ में आहुति देने का संकल्प लिया। 
     

    व्यवसायियों ने उठाया गोवंश को गोद लेने का बीड़ा  

    राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में गौशाला पहुंचे व्यवसायी वर्ग ने यहां की व्यवस्था और निस्वार्थ सेवा को देख गहरी संतुष्टि व्यक्त की। भ्रमण के दौरान अधिकांश व्यवसायियों ने एक-एक गोवंश को गोद लेने तथा उसका मासिक खर्च वहन करने की घोषणा की।

    गौशाला प्रबंधन द्वारा बताया गया कि एक गाय के रखरखाव और चारे पर प्रतिदिन मात्र 40 रुपये यानी महीने का कुल 1,200 रुपये का खर्च आता है। इस छोटी सी राशि के माध्यम से कोई भी व्यक्ति गौ सेवा का पुण्य प्राप्त कर सकता है। 
     

    बीएसएफ द्वारा बचाए गए गोवंश का सहारा है 'गोलोक धाम' 

    इस आह्वान पर वहां उपस्थित सैकड़ों व्यवसायियों ने हाथ उठाकर सहमति जताई और गौ माता के समर्थन में जयघोष किया। गौशाला की संचालिका डॉ. शालिनी मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में यहां 23,000 से अधिक गोवंश की देखरेख की जा रही है। 
     
    उन्होंने जानकारी दी कि यहां रहने वाले अधिकांश गोवंश भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ (BSF) द्वारा तस्करों से बचाए गए हैं। अंतरराज्यीय गो तस्करी के दौरान पुलिस द्वारा मुक्त कराए गए गोवंश को भी यहां आश्रय दिया गया है।
     

    80 एकड़ में फैला गो-सेवा का विशाल साम्राज्य 

    आश्रय प्राप्त गोवंश में अधिकांश नंदी (बैल) और दूध न देने वाली गाएं शामिल हैं, जिनकी सेवा पूरी श्रद्धा के साथ की जाती है। 80 एकड़ भूमि पर फैले इस गौशाला में गोवंश को भरपूर भोजन, स्नेह और चिकित्सा सुविधा दी जाती है। 
     
    यहां बीमार गायों के उपचार के लिए विशेष 'धनवंतरी वार्ड' भी बनाया गया है। सेवा के इस कार्य में 400 से अधिक स्थानीय आदिवासी श्रमिक दिन-रात लगे हुए हैं, जो गौशाला के सुचारू संचालन में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं। 
     

    समाज के हर वर्ग से सहभागी बनने की अपील  

    कार्यक्रम के दौरान राजेश अग्रवाल ने कहा कि वे न केवल स्वयं निरंतर सहयोग करेंगे, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी इस पुनीत कार्य से जोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। डॉ. शालिनी मिश्रा ने समाज के प्रबुद्ध वर्ग से अपील की कि वे गोलोक धाम के इस अभियान का हिस्सा बनें ताकि कोई भी गोवंश लावारिस या कत्लखानों की ओर न जाए।

    इस मौके पर जमशेदपुर से दीपचंद अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, युगल रिंगसिया, सुरेश अग्रवाल, मानव केडिया, शशि मित्तल, डॉ. निरंजन दास गुप्ता, विवेक संघी, मोहित कांवटिया और सत्यनारायण केडिया समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।