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DD Bar Murder Case: प्री-प्लान्ड था हमला, कार में पहले से छिपाए थे हथियार; बार संचालक ने बदला था सिम कार्ड

Published: Sun, 12 Jul 2026 11:58 PM (IST)

जमशेदपुर के डीडी बार के बाहर हुए हिमांशु सिंह हत्याकांड की जांच में खुलासा हुआ है कि यह सुनियोजित था, ...और पढ़ें

हिमांशु हत्‍याकांड की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

हिमांशु हत्‍याकांड की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. हत्या सुनियोजित थी, आरोपी ने पहले से हथियार छिपाए थे।

  2. SIT डिजिटल साक्ष्यों से मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। बिष्टुपुर स्थित डीडी बार के बाहर हुए बहुचर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड की जांच में पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) को कई चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। 
 
अब तक इस वारदात को बार के भीतर हुए तात्कालिक विवाद का नतीजा माना जा रहा था, लेकिन मुख्य आरोपित विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा से हुई पूछताछ ने पूरी कहानी बदल दी है। पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि हिमांशु की हत्या पूरी तरह से सुनियोजित (Pre-planned) थी।
 

वारदात से पहले ही कार में छिपा दिए थे हथियार

मुख्य आरोपित बोदरा ने पुलिस के सामने स्वीकार किया है कि उसने वारदात को अंजाम देने से पहले ही अपनी कार में चापड़ समेत कई अन्य घातक हथियार छिपाकर रख दिए थे। 
 
इसके बाद उसने सुनियोजित तरीके से अपने समर्थकों को मौके पर बुलाया और पुलिस वैन से हिमांशु सिंह को खींचकर उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बर हमले में हिमांशु की मौत हो गई, जबकि उनका साथी प्रत्युष आनंद गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका इलाज चल रहा है।
 

बार संचालक की भूमिका संदिग्ध, बदला था सिम कार्ड

जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि डीडी बार के संचालक नीरज सिंह ने घटना के तुरंत बाद अपना सिम कार्ड बदल लिया था। 
 
इससे पहले बार के मैनेजर ने बयान दिया था कि मारपीट की सूचना देने के लिए उसने नीरज सिंह को फोन किया था, जो उनके पुत्र ने उठाया था। घटना के ठीक बाद सिम कार्ड बदले जाने को पुलिस बेहद संदिग्ध मान रही है।
 
इस मामले के दो मुख्य आरोपितों- नीरज सिंह और बोदरा की पुलिस रिमांड अवधि सोमवार को पूरी हो रही है, जिसके बाद पुलिस दोनों को अदालत में प्रस्तुत करेगी।
 

खुलासे से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:

  •     पहले से परिचित थे हमलावर: हत्या के आरोप में पकड़े गए सभी आरोपी एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे।
  •     घटना के अगले दिन भी पहुंचे थे बार: दुस्साहस का आलम यह था कि वारदात के अगले दिन यानी 28 जून को भी हमलावर पुलिस की गतिविधि देखने दोबारा बार के पास पहुंचे थे।
  •     सफेदपोशों पर शक: पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि इस पूरे हत्याकांड के पीछे किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क या प्रभावशाली सफेदपोश लोगों का हाथ हो सकता है।


जंगल और अवैध शराब भट्ठी में छिपा था बोदरा

फरारी के दौरान पुलिस को छकाने के लिए विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा जमशेदपुर-सरायकेला सीमा पर स्थित जिलिंगगोड़ा के घने जंगलों में छिपा रहा। 
 
उसने वहां एक अवैध शराब भट्ठी को अपना ठिकाना बनाया था। इस दौरान उसने अपना पुराना मोबाइल नंबर पूरी तरह बंद कर दिया था और किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी फर्जी सिम कार्ड से अपने करीबियों के संपर्क में था।
 

डिजिटल साक्ष्यों पर टिकी एसआईटी की जांच

मामले की तफ्तीश में जुटी एसआईटी अब नीरज सिंह, राहुल दुबे और अन्य आरोपितों के नए मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन और सोशल मीडिया चैट हिस्ट्री की गहन फॉरेंसिक जांच कर रही है। 
 
पुलिस का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों के जरिए हत्या की साजिश रचने वाले असली मास्टरमाइंड और फरार अपराधियों तक जल्द ही पहुंचा जा सकेगा।