विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बांस की खेती से चमकेगी पूर्वी सिंहभूम के किसानों की किस्मत: सरकारी जमीन पर 100% और निजी भूमि पर 50% सब्सिडी

Published: Wed, 09 Sep 2026 06:00 AM (IST)

पूर्वी सिंहभूम में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला उद्यान विभाग ने 32 हेक्टेयर में बांस की खेती की योजना बनाई है।

जिले में कुल 32 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस के पौधे लगाए जाएंगे, जिस पर सरकार 8 लाख 64 हजार रुपये की राशि खर्च करेगी।

जिले में कुल 32 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस के पौधे लगाए जाएंगे, जिस पर सरकार 8 लाख 64 हजार रुपये की राशि खर्च करेगी।

HighLights

  1. पूर्वी सिंहभूम में 32 हेक्टेयर पर बांस की खेती।

  2. ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले में बांस की खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए जिला उद्यान विभाग ने एक विशेष योजना तैयार की है। 
 
इसके तहत जिले में कुल 32 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस के पौधे लगाए जाएंगे, जिस पर सरकार 8 लाख 64 हजार रुपये की राशि खर्च करेगी। प्रति हेक्टेयर औसतन 36 हजार रुपये की लागत तय की गई है।

योजना के अनुसार, कुल 32 हेक्टेयर में से 8 हेक्टेयर सरकारी जमीन का चयन किया गया है। सरकारी भूमि पर होने वाली खेती का पूरा खर्च (100 प्रतिशत अनुदान) जिला उद्यान विभाग वहन करेगा, जिसमें पौधों से लेकर सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

वहीं, जिले के आम किसानों की 24 हेक्टेयर निजी भूमि पर भी बांस के पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए किसानों को सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

योजना की मुख्य बातें :

  •     कुल लक्ष्य: 32 हेक्टेयर
  •     सरकारी भूमि: 8 हेक्टेयर (100% अनुदान)
  •     किसानों की भूमि: 24 हेक्टेयर (50% अनुदान)
  •     कुल बजटीय प्रावधान: 8.64 लाख रुपये
  •     प्रति हेक्टेयर लागत: लगभग 36,000 रुपये

 

रोजगार और स्वरोजगार के बढ़ेंगे अवसर

उद्यान विभाग का मानना है कि बांस तेजी से बढ़ने वाली फसल है, जो किसानों के लिए दीर्घकालिक और अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बन सकती है। 
 
बांस का उपयोग फर्नीचर, टोकरियां, चटाइयां, सजावटी सामान, कृषि उपकरण, हस्तशिल्प और अगरबत्ती की स्टिक बनाने में व्यापक रूप से होता है।
 
जिले में बड़े पैमाने पर बांस उत्पादन होने से स्थानीय स्तर पर कुटीर उद्योगों, प्रसंस्करण इकाइयों और हस्तशिल्प से जुड़े कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। 
 
जिससे ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से भी बांस की खेती काफी लाभप्रद मानी जाती है।
 

किसानों को आगे आने की अपील 

पूर्वी सिंहभूम के जिला उद्यान पदाधिकारी विवेक बिरुआ ने कहा क‍ि बांस की खेती किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में बेहद मददगार साबित होगी। 
 
इससे न केवल आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए साधन विकसित होंगे। किसानों को इस सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए।"