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    रेलवे का बड़ा फैसला: अब ₹250000000 में मिलेगा 'ऑल इंडिया एक्सेस', देश में सस्ती और आसान होगी माल ढुलाई

    By Nirmal PrasadEdited By: Rajat Mourya
    Updated: Thu, 06 Aug 2026 02:12 PM (IST)

    भारतीय रेल ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था को सरल बनाया है। अब ₹25 करोड़ के एक समान शुल्क पर पूरे देश में परिचालन के लिए सिंगल ऑल ...और पढ़ें

    अब ₹250000000 में मिलेगा 'ऑल इंडिया एक्सेस', देश में सस्ती और आसान होगी माल ढुलाई

    अब ₹250000000 में मिलेगा 'ऑल इंडिया एक्सेस', देश में सस्ती और आसान होगी माल ढुलाई

    HighLights

    1. एक समान ₹25 करोड़ शुल्क पर सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस।

    2. 20 वर्ष की अवधि, बिना शुल्क अगले 20 वर्षों तक विस्तार।

    3. निजी भागीदारी बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। भारतीय रेल ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (सीटीओ) के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए परिचालन नियमों को सरल बनाया है। अब अलग-अलग मार्ग श्रेणियों के लिए अलग लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    इसके स्थान पर 25 करोड़ रुपये के एक समान पंजीकरण शुल्क के साथ मिलने वाले सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस के आधार पर ऑपरेटर देश भर में भारतीय रेल नेटवर्क के सभी मार्गों पर कंटेनर ट्रेनों का परिचालन कर सकेंगे।

    रेल मंत्रालय के इस फैसले को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है और इसे राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लागू किया जाएगा।

    अब तक कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को विभिन्न मार्ग श्रेणियों के अनुसार, अलग-अलग अनुमति और शुल्क देना पड़ता था। नई व्यवस्था में यह जटिल प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है।

    सभी नए आवेदकों को एक बार 25 करोड़ रुपये का अप्रतिदेय पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा, जिसके बाद उन्हें पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर परिचालन की अनुमति मिल जाएगी।

    भारतीय रेल ने लाइसेंस की अवधि बढ़ाने को भी आसान बना दिया है। ऑपरेटरों की 20 वर्ष की कन्सेशन अवधि पूरी होने के बाद संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर लाइसेंस को अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विस्तार के लिए किसी प्रकार का नवीनीकरण या विस्तार शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    मौजूदा ऑपरेटरों को भी नई व्यवस्था में राहत दी गई है। कैटेगरी-1 के लाइसेंसधारी अपनी मौजूदा अवधि पूरी होने तक पूर्व व्यवस्था के तहत परिचालन जारी रख सकेंगे और नवीनीकरण के समय उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    वहीं कैटेगरी-2, 3 और 4 के आपरेटरों को नई व्यवस्था में शामिल होने के लिए 15 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।

    यह राशि पहले जमा किए गए 10 करोड़ रुपये और नए निर्धारित 25 करोड़ रुपये के बीच का अंतर होगी। ये ऑपरेटर चाहें तो अपनी 20 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले भी नई व्यवस्था में शामिल हो सकते हैं

    रेल मंत्रालय का मानना है कि एक समान लाइसेंसिंग व्यवस्था से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और कंटेनर ट्रेनों का परिचालन तेजी से विस्तार पाएगा। इससे उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), को कम लागत पर माल ढुलाई की सुविधा मिलेगी और लाजिस्टिक्स खर्च में कमी आएगी।

    रेल आधारित कंटेनर परिवहन को बढ़ावा मिलने से बड़ी मात्रा में माल सड़क के बजाय रेल मार्ग से भेजा जाएगा। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़भाड़ कम होगी, ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

    भारतीय रेल का कहना है कि यह सुधार कारोबार सुगमता को बढ़ाने के साथ-साथ देश में टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल माल परिवहन प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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