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    जमशेदपुर के 2 शहरी क्षेत्रों को 500 करोड़ का नुकसान, अब निकाय चुनाव के बाद खुलेगा विकास का रास्ता

    Updated: Wed, 11 Feb 2026 11:58 AM (IST)

    जमशेदपुर के मानगो और जुगसलाई में निकाय चुनाव न होने से केंद्र सरकार के करोड़ों रुपये के अनुदान का नुकसान हुआ है। 15वें वित्त आयोग के नियमों के कारण नि ...और पढ़ें

    चुनाव न होने से जमशेदपुर के दो शहरी क्षेत्रों को 500 करोड़ से अधिक का घाटा। फोटो नोटबुक एलएम

    चुनाव न होने से जमशेदपुर के दो शहरी क्षेत्रों को 500 करोड़ से अधिक का घाटा। फोटो नोटबुक एलएम

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    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जमशेदपुर के दो प्रमुख शहरी क्षेत्रों, मानगो और जुगसलाई, में होने जा रहे निकाय चुनाव केवल पार्षद या मेयर चुनने की कवायद नहीं हैं, बल्कि केंद्र सरकार के उस खजाने की चाबी हासिल करने की कोशिश है, जो पिछले कई वर्षों से निर्वाचित बोर्ड न होने के कारण बंद पड़ा है।

    15वें वित्त आयोग के कड़े नियमों के कारण निर्वाचित जनप्रतिनिधि न होने की वजह से इन दोनों निकायों ने अब तक करोड़ों रुपये का केंद्रीय अनुदान गंवा दिया है।

    एक अनुमान के मुताबिक, पिछले वर्षों में निर्वाचित बोर्ड न होने के कारण इन दोनों क्षेत्रों ने केंद्र सरकार से मिलने वाले करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास अनुदान गंवा दिए हैं।

    मानगो नगर निगम : 7 साल और 350 करोड़ का नुकसान

    मानगो को 2017 में नगर निगम बनाया गया था। नियमतः एक नगर निगम को केंद्र से प्रतिवर्ष लगभग 40 से 60 करोड़ रुपये का अनुदान मिलता है। 2017 से 2024 के बीच मानगो में एक बार भी चुनाव नहीं हुए।

    वित्त आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक, टाइड और अनटाइड फंड का एक बड़ा हिस्सा केवल तभी जारी होता है जब वहां एक निर्वाचित बोर्ड काम कर रहा हो।

    मानगो ने पिछले सात वर्षों में करीब 300 से 350 करोड़ रुपये का वह फंड खो दिया है, जिससे यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और फ्लाईओवर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के पूरा किया जा सकता था।

    जुगसलाई नगर परिषद: 42 साल का वित्तीय वनवास

    जुगसलाई की कहानी और भी दुखद है। यहां आखिरी बार चुनाव 1982 में हुए थे। पिछले 4 दशकों से यह निकाय केवल राज्य सरकार के सीमित फंड और स्थानीय टैक्स के भरोसे चल रहा है।

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    Jharkhand Muncipal Election (1)

    केंद्रीय शहरी विकास योजनाओं (जैसे अमृत मिशन और स्वच्छ भारत 2.0) के तहत मिलने वाली परफार्मेंस ग्रांट जुगसलाई को कभी मिल ही नहीं पाई, क्योंकि इसके लिए निर्वाचित स्थानीय सरकार होना अनिवार्य शर्त है।

    विशेषज्ञों का अनुमान है कि जुगसलाई ने चार दशकों में विकास के लिए मिलने वाले 150 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त अनुदान का नुकसान उठाया है।

    क्यों रुक जाता है पैसा?

    15वें वित्त आयोग (की सिफारिशों के अनुसार, केंद्र सरकार शहरी निकायों को दो तरह से पैसा देती है:

    बेसिक ग्रांट: जो वेतन और छोटे कार्यों के लिए होता है।
    टाइड ग्रांट : जो केवल पेयजल, स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन के लिए होता है।

    आयोग की स्पष्ट शर्त है कि 31 मार्च 2024 के बाद केवल उन्हीं राज्यों/निकायों को ग्रांट दी जाएगी, जहां निर्वाचित बोर्ड अस्तित्व में होगा।

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव टलने के कारण अकेले 2022-23 और 2023-24 के वित्तीय वर्ष में राज्य को मिलने वाले लगभग 800 करोड़ रुपये केंद्र ने रोक दिए थे, जिसमें मानगो और जुगसलाई का हिस्सा सबसे बड़ा था।