Biodiversity day: खतरे में जमशेदपुर की जीवनरेखा; स्वर्णरेखा और खरकाई नदी में बढ़ा प्रदूषण, घटने लगा ऑक्सीजन लेवल
जमशेदपुर की स्वर्णरेखा और खरकाई नदियाँ गंभीर प्रदूषण से जूझ रही हैं, जिससे उनका पारिस्थितिक तंत्र और जलीय जीवन खतरे में है। विशेषज्ञों ने समय रहते ठोस ...और पढ़ें

Condition Of Jharkhand Rivers: अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही स्वर्णरेखा और खरकई नदी।
HighLights
सीवेज और औद्योगिक कचरा पानी को जहरीला बना रहा है।
जलीय जीवों और प्रवासी पक्षियों का अस्तित्व खतरे में।
सीवेज और इंडस्ट्रियल वेस्ट ने पानी को बनाया विषैला
जानें क्या होता है पानी कम होने से
बायो-इंडिकेटर दे रहे हैं खतरे का संकेत, पनप रहा है 'एल्गी ब्लूम'
संकट में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का आशियाना
स्वर्णरेखा और खरकाई नदियां केवल इंसानों और जलीय जीवों के लिए ही नहीं, बल्कि कई दुर्लभ स्थानीय और विदेशी प्रवासी पक्षियों का भी प्रमुख आश्रय स्थल रही हैं। हर साल सर्दियों के मौसम में दूर देशों से आने वाले शीतकालीन प्रवासी पक्षी यहाँ डेरा जमाते हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- यूरेशियन हूपो (Eurasian Hoopoe)
- सिट्रिन वैगटेल (Citrine Wagtail)
- ब्लू थ्रोट (Blue Throat)
- रड्डी शेल्डक (Ruddy Shelduck)
जैव विविधता संरक्षण को लेकर सरकार सक्रिय
दूसरी ओर, बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच सरकारी स्तर पर भी कोशिशें तेज की जा रही हैं। झारखंड जैव विविधता पर्षद के चेयरमैन विश्वनाथ शाह ने बताया कि राज्य में वन संरक्षण, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और जल स्रोतों के संवर्धन के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं।
सरकार द्वारा उठाए जा रहे कुछ प्रमुख कदम:
- कैनरी पहाड़ बना पहला हेरिटेज साइट: हजारीबाग के प्रसिद्ध कैनरी पहाड़ को झारखंड का पहला 'जैव विविधता विरासत स्थल' (Biodiversity Heritage Site) घोषित किया गया है।
- जागरूकता अभियान: विभिन्न पंचायतों, विद्यालयों और पर्यावरण संस्थानों के माध्यम से लुप्तप्राय पौधों के रोपण और उनके संरक्षण को लेकर सघन जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
पर्यावरणविदों का मानना है कि सरकारी योजनाओं के साथ-साथ जब तक जमशेदपुर के नागरिक और स्थानीय उद्योग नदियों को स्वच्छ रखने में अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक स्वर्णरेखा और खरकाई को इस महासंकट से निकालना नामुमकिन होगा।