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    उम्मीदों की लंबी कतार: तपती धूप में 'मंइयां' का धैर्य, सम्मान की एक किश्त के लिए छह बजे से 'तपस्या'

    Updated: Tue, 12 May 2026 11:09 PM (IST)

    जमशेदपुर के खासमहल प्रखंड कार्यालय में हजारों महिलाएं 'मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना' की पेंशन सत्यापन के लिए चिलचिलाती धूप में लंबी कतारों में खड़ी ...और पढ़ें

    मंइयां सम्‍मान योजना को लेकर आवेदन सत्‍यापन कराने के लिए उमड़ी लाभुकों की भीड़।

    मंइयां सम्‍मान योजना को लेकर आवेदन सत्‍यापन कराने के लिए उमड़ी लाभुकों की भीड़।

    HighLights

    1. पेंशन सत्यापन के लिए हजारों महिलाएं कतार में।

    2. खासमहल प्रखंड कार्यालय में तपती धूप में इंतजार।

    3. 31 मई तक सत्यापन की अंतिम समय सीमा।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। चिलचिलाती धूप, माथे पर पसीने की बूंदें और हाथों में अपनी पहचान के दस्तावेजों का पुलिंदा- जमशेदपुर का खासमहल प्रखंड कार्यालय इन दिनों कुछ इसी दृश्य का साक्षी बना हुआ है। 'मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना' के तहत अपनी रुकी हुई पेंशन को सुचारू कराने और सत्यापन (वेरिफिकेशन) की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हजारों महिलाएं कतारों में खड़ी हैं।
     
    यह केवल सरकारी काम नहीं, बल्कि स्वावलंबन की एक ऐसी प्यास है, जिसे पाने के लिए महिलाएं सुबह छह बजे से ही उमस और गर्मी को चुनौती दे रही हैं। 
     

    स्वाति की बूंद का इंतजार और 'ममता का मेला' 

    जैसे चातक पक्षी स्वाति नक्षत्र की पहली बूंद की प्रतीक्षा करता है, वैसे ही ये महिलाएं अपनी बारी आने के इंतजार में घंटों खड़ी हैं। प्रखंड और अंचल कार्यालय का परिसर मानों 'ममता के मेले' में तब्दील हो गया है। 
     
    प्रशासन ने सत्यापन के लिए 31 मई तक की समय सीमा तय की है, जिसके कारण आखिरी दिनों में भारी भीड़ उमड़ रही है। जिन लाभुकों की पेंशन किसी तकनीकी कारण से रुकी है, वे फॉर्म संख्या 25/26 के साथ आधार, बैंक पासबुक और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज जमा करने के लिए व्याकुल हैं।
     

    तपस्या के बीच सिसकती उम्मीदें 

    प्रखंड कार्यालय में खड़ा होना किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है। बारीडीह से आई कांति देवी का दर्द उनकी आंखों में साफ झलकता है। उन्होंने बताया क‍ि सुबह घर का चूल्हा-चौका छोड़कर 7 बजे ही यहां आ गई थी, ताकि लाइन में आगे रह सकूं। यह पैसा भले ही कम लगे, लेकिन यह हमारे आत्मसम्मान से जुड़ा है।

    सुंदरनगर की संगीता सोरेन की व्यथा भी अलग नहीं है। वे कहती हैं क‍ि भीड़ इतनी है कि सांस लेना दूभर है, लेकिन अगर सत्यापन नहीं हुआ और पेंशन रुक गई, तो घर के बजट का पहिया थम जाएगा।
     

    प्रशासन की अपील और भविष्य का भरोसा 

    भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष काउंटर तो बनाए हैं, लेकिन महिलाओं की तादाद के आगे वे कम पड़ रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन प्रक्रिया के बाद रुकी हुई राशि का भुगतान सीधे बैंक खातों में सुचारू रूप से शुरू कर दिया जाएगा। 
     
    प्रशासन ने महिलाओं से धैर्य बनाए रखने की अपील की है, लेकिन समय की पाबंदी और अपनी जरूरत के आगे महिलाओं का धैर्य हर गुजरते घंटे के साथ जवाब दे रहा है।


    खासमहल प्रखंड कार्यालय का यह नजारा झारखंड की ग्रामीण और मध्यमवर्गीय महिलाओं के उस मौन संघर्ष की कहानी कह रहा है, जहां कुछ सौ रुपयों की पेंशन उनके जीवन की बड़ी खुशियों और स्वाभिमान का आधार है। तपती रेत पर उम्मीदों की फसल उगाने की यह जद्दोजहद 31 मई तक इसी तरह जारी रहने के आसार हैं।