9वीं की परीक्षा देने घर से निकला और दस्ते में शामिल हो गया, एके-47 लेकर चलता मंगल; किशनजी का रह चुका है बॉडीगार्ड
माओवादी असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद, इनामी जोनल कमांडर मंगल महतो और उसकी पत्नी मालती मुर्मू को पश्चिम बंगाल ...और पढ़ें

पत्नी मालती मुर्मू के साथ पुलिस वाहन में सवार माओवादी राजू महतो उर्फ मंगल।
HighLights
इनामी माओवादी जोनल कमांडर मंगल महतो गिरफ्तार।
उसकी पत्नी मालती मुर्मू भी पश्चिम बंगाल से पकड़ी गई।
झारखंड-बंगाल सीमा पर हथियारों की तलाश में सर्च ऑपरेशन।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश की गिरफ्तारी के बाद उसके दस्ते के पुराने और करीबी सदस्यों पर भी पुलिस का शिकंजा कस गया है। पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के सालबनी थाना क्षेत्र के सरबेड़िया गांव से पांच लाख रुपये के इनामी माओवादी जोनल कमांडर समीर उर्फ मंगल महतो और उसकी पत्नी दो लाख रुपये की इनामी एरिया कमेटी सदस्य मालती मुर्मू को गिरफ्तार किया गया है।
हालांकि, दोनों की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं की गई है। असीम मंडल, मंगल महतो और मालती मुर्मू से पूछताछ के बाद अब झारखंड-बंगाल सीमा से सटे जंगलों में सर्च ऑपरेशन की तैयारी है। पुलिस को आशंका है कि माओवादी गतिविधियों के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियार और विस्फोटक जंगल में छिपाए गए हैं।
तलाशी के दौरान एके-47, इंसास राइफल, केन बम, बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री की तलाश की जाएगी। हथियारों की बरामदगी और पूछताछ के बाद ही पुलिस पूरे मामले का आधिकारिक खुलासा कर सकती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, असीम मंडल से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ ने सरबेड़िया गांव में छापेमारी की।
बताया जा रहा है कि माओवादी गतिविधियां कमजोर पड़ने के बाद मंगल और मालती ने जंगल में हथियार छिपाए और नक्सली वर्दी छोड़कर सामान्य नागरिक के रूप में वहां से निकल गए थे। इसके बाद दोनों एक वाहन से सरबेड़िया पहुंचे और दलमा की तराई से पकड़े गए माओवादी मदन महतो के एक रिश्तेदार के घर छिपकर रह रहे थे।
मंगल और मालती को माओवादी संगठन के शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्य कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी का करीबी बताया जाता है। दोनों उसके अंगरक्षक के रूप में भी काम कर चुके हैं। वर्ष 2011 में किशनजी के मुठभेड़ में मारे जाने के दौरान मंगल के भी घटनास्थल पर मौजूद होने की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, वह घेराबंदी तोड़कर निकल भागा था। इसके बाद मंगल और मालती असीम मंडल के दस्ते में शामिल हो गए थे। दोनों ने झारखंड-बंगाल सीमावर्ती इलाकों में संगठन के साथ कई माओवादी गतिविधियों में हिस्सा लिया।
एके-47 लेकर चलता था मंगल और मालती इंसास
मंगल महतो वर्ष 2008 में कूरियर के रूप में माओवादी संगठन से जुड़ा था। वर्ष 2009 में नौवीं की परीक्षा देने के नाम पर घर से निकला और फिर दस्ते में शामिल हो गया। बाद में संगठन में उसकी भूमिका बढ़ती गई और वह जोनल कमांडर के स्तर तक पहुंचा।
पुलिस के अनुसार, वह एके-47 लेकर चलता था। मालती मुर्मू का बचपन आर्थिक कठिनाइयों में बीता। मां की बचपन में ही मृत्यु हो गई थी, जबकि पिता मजदूरी करते थे।
करीब 15 वर्ष की उम्र में वह चाचा के घर से निकलकर माओवादी दस्ते में शामिल हो गई थी। बाद में उसने मंगल से विवाह कर लिया। पुलिस के अनुसार, मालती इंसास राइफल लेकर दस्ते के साथ चलती थी।
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