रांची-जमशेदपुर हाईवे का वो चमत्कारी मंदिर, जहां बिना शीश झुकाए आगे नहीं बढ़ती कोई भी गाड़ी!
जमशेदपुर-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पारडीह काली माता मंदिर सदियों पुरानी आस्था का प्रतीक है, जो अपनी 500 वर्ष से ...और पढ़ें

रांची-जमशेदपुर हाईवे का वो चमत्कारी मंदिर, जहां बिना शीश झुकाए आगे नहीं बढ़ती कोई भी गाड़ी!
HighLights
पारडीह काली मंदिर जमशेदपुर-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है।
मंदिर का इतिहास 500 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है।
519 किलोग्राम चांदी से सजा है मां काली का दरबार।
संवाद सूत्र, चांडिल। जमशेदपुर-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग 33 के किनारे स्थित पारडीह काली माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था और विश्वास का प्रतीक है। वन देवी काली मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में मां के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
वहीं, इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर और वाहन चालक भी मां के दरबार में शीश नवाना नहीं भूलते। सरकारी दस्तावेजों एवं अभिलेखों में मंदिर का इतिहास करीब 125 वर्ष पुराना बताया जाता है, जबकि स्थानीय लोगों और मंदिर से जुड़ी किंवदंतियों के अनुसार यह धार्मिक स्थल 500 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है।
मान्यता है कि ब्रिटिश शासन से पहले भी घने जंगलों के बीच इस स्थान पर मां भगवती विराजमान थीं। उस समय पूरा इलाका सघन वन क्षेत्र से घिरा हुआ था।
स्थानीय पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में राजा-महाराजा शिकार अथवा युद्ध पर जाने से पहले यहां पहुंचकर वन देवी मां काली की पूजा-अर्चना करते थे। ऐसी धारणा थी कि मां के दरबार में माथा टेकने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति और आशीर्वाद मिलता था।
वर्ष 1928 से नागा संन्यासियों की देखरेख में मंदिर
मंदिर की धार्मिक परंपरा में नागा संन्यासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1928 में तत्कालीन गोबरघुसी के राजा ने लिखित रूप से मंदिर की देखरेख और धार्मिक गतिविधियों का संचालन नागा संन्यासियों को सौंप दिया था।
वर्तमान में जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत विद्यानंद सरस्वती जी मंदिर के मुख्य महंत हैं। उनके नेतृत्व में मंदिर की धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियां संचालित होती हैं।
519 किलो चांदी से सजा मां का दरबार
आधुनिक दौर में पारडीह काली मंदिर ने अपनी भव्यता के कारण भी अलग पहचान बनाई है। मंदिर में 519 किलोग्राम शुद्ध चांदी से मां काली का भव्य मंडप और मुख्य प्रवेश द्वार तैयार किया गया है।
चांदी की आकर्षक नक्काशी से सजा मां का दरबार श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। दावा किया जाता है कि झारखंड में इतनी बड़ी मात्रा में चांदी की नक्काशी से सुसज्जित यह पहला मंदिर है।
सुरक्षित यात्रा के लिए राहगीर भी टेकते हैं माथा
जमशेदपुर-रांची मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों, खासकर भारी मालवाहक ट्रकों के चालकों के बीच इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था है। कई चालक अपनी यात्रा शुरू करने से पहले अथवा रास्ते में मंदिर के सामने वाहन रोककर मां काली का आशीर्वाद लेते हैं।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां के दर्शन और आशीर्वाद से उनकी यात्रा सुरक्षित एवं निर्विघ्न पूरी होती है। इस तरह पारडीह काली मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ इस व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले हजारों यात्रियों के विश्वास का भी केंद्र बना हुआ है।
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