टाटा स्टील को रामगढ़ से 1755 करोड़ का नोटिस, कंपनी ने खनन विभाग के खिलाफ केंद्र सरकार से की अपील
रामगढ़ खनन विभाग ने Tata Steel पर वेस्ट बोकारो खदान से 2000-2007 के दौरान 1.62 करोड़ टन अधिक कोयला निकालने का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

रामगढ़ खनन विभाग की ओर से टाटा स्टील पर तय सीमा से ज्यादा कोयला निकालने का आरोप।
HighLights
रामगढ़ खनन विभाग ने टाटा स्टील पर जुर्माना लगाया।
कंपनी पर 1.62 करोड़ टन अधिक कोयला निकालने का आरोप।
टाटा स्टील ने कोयला मंत्रालय में नोटिस को चुनौती दी।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड के रामगढ़ जिला खनन विभाग ने टाटा स्टील पर क्षमता से अधिक कोयला निकालने का आरोप लगाते हुए 1,755.10 करोड़ रुपये के जुर्माने का नोटिस भेजा है।
कंपनी ने इस मांग को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए इसके खिलाफ नई दिल्ली स्थित कोयला मंत्रालय (भारत सरकार) के समक्ष याचिका दायर कर दी है।
यह पूरा विवाद करीब दो दशक पुराने खनन से जुड़ा है। रामगढ़ के जिला खनन अधिकारी (डीएमओ) ने 30 मार्च 2026 को टाटा स्टील को एक नोटिस भेजा, जो कंपनी को तीन अप्रैल को प्राप्त हुआ।
इसमें आरोप है कि कंपनी ने अपनी वेस्ट बोकारो खदान से वित्तीय वर्ष 2000-01 से लेकर 2006-07 के बीच तय सीमा से लगभग 1.62 करोड़ मीट्रिक टन ज्यादा कोयला निकाला है।इस कथित अतिरिक्त खनन के एवज में विभाग ने कुल 1,755.10 करोड़ रुपये की मांग की है।
क्या है जुर्माने का आधार
रामगढ़ खनन विभाग का यह नोटिस कामन काज बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले पर आधारित है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि यदि कोई कंपनी सरकार द्वारा स्वीकृत योजना या तय सीमा से ज्यादा खनन करती है, तो वह अवैध माना जाएगा।
ऐसे में उस अतिरिक्त खनिज की पूरी कीमत पेनाल्टी (जुर्माने) के तौर पर वसूली जाएगी। इसी नियम का हवाला देकर झारखंड सरकार ने यह भारी-भरकम राशि मांगी है।
चूंकि टाटा स्टील शेयर बाजार में सूचीबद्ध एक बड़ी कंपनी है, इसलिए निवेशकों की जानकारी के लिए उसने सेबी के नियमों के तहत यह जानकारी सार्वजनिक की है।
कंपनी प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि राज्य सरकार की इस मांग का कोई कानूनी या तथ्यात्मक आधार नहीं है और यह पूरी तरह से अनुचित है।
आगे की कानूनी राह
जुर्माने का विरोध करते हुए टाटा स्टील ने इसी साल 24 अप्रैलको भारत सरकार के कोयला मंत्रालय की ''रिवीजनल अथॉरिटी'' (पुनरीक्षण प्राधिकारी) में एक आधिकारिक अपील दायर कर दी है।
कंपनी ने केंद्र सरकार से राज्य के इस आदेश की दोबारा जांच कर इसे रद करने की मांग की है। इस मामले में झारखंड सरकार और रामगढ़ के खनन अधिकारी को जवाबदेह (प्रतिवादी) बनाया गया है।
अब इस करोड़ों के विवाद की सुनवाई केंद्र सरकार के स्तर पर होगी। टाटा स्टील के प्रतिनिधि ने पूरे आरोप को बेबुनियाद बताया है। कंपनी नियमानुसार कार्य करती है।