टाटा स्टील ग्रेड रिवीजन: MGB और DA वैल्यू पर फंसा पेंच, सोशल मीडिया पर आपस में ही भिड़े यूनियन नेता
टाटा स्टील के कर्मचारियों के ग्रेड रिवीजन पर MGB और DA वैल्यू को लेकर गतिरोध बना हुआ है। इस देरी से कर्मचारियों में असंतोष और यूनियन के भीतर आंतरिक कल ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
टाटा वर्कर्स यूनियन में आंतरिक कलह उजागर।
वेतन समझौते पर गुरुवार को होगी वार्ता।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए 1 जनवरी 2025 से लंबित ग्रेड रिवीजन को लेकर कंपनी प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच मैराथन बैठकों का दौर जारी है। हालांकि, कर्मचारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन चुकी है, लेकिन न्यूनतम गारंटीड बेनिफिट (MGB) और महंगाई भत्ता (DA) वैल्यू पर पेंच अभी भी फंसा हुआ है।
इस देरी की वजह से जहां एक तरफ टाटा स्टील के कर्मचारियों में भारी असंतोष और आक्रोश का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ टाटा वर्कर्स यूनियन और कंपनी प्रबंधन भी भारी दबाव में काम कर रहे हैं।
कहां अटकी है बात और क्या है उम्मीद
सूत्रों के मुताबिक, नए वेतन समझौते में पुराने और नए कर्मचारियों के लिए अलग-अलग फॉर्मूले पर खींचतान चल रही है:
MGB पर खींचतान: पुराने ग्रेड के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम गारंटीड बेनिफिट (MGB)को करीब 10 प्रतिशत तक सीमित रखने का अनुमान लगाया जा रहा है।
- DA वैल्यू में राहत: नए वेतन समझौते में एनएस (NS) ग्रेड के कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। उनका डीए प्रति प्वाइंट वैल्यू 0.3 पैसे से बढ़ाकर ₹4 या ₹4.50 तक किए जाने पर सहमति बन सकती है।
- बेसिक सैलरी पर पेच: कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी और नए-पुराने कर्मचारियों के लिए अलग-अलग MGB के प्रस्ताव को लेकर दोनों पक्ष अभी भी आमने-सामने हैं।
यूनियन में मंचा घमासान: पक्ष-विपक्ष आमने-सामने
ग्रेड रिवीजन में हो रही देरी के बीच अब टाटा वर्कर्स यूनियन के भीतर ही अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। यूनियन के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप पर विपक्ष और कमेटी मेंबरों ने वर्तमान यूनियन अध्यक्ष को उनके पुराने कार्यकाल को लेकर कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कमेटी मेंबरों ने अध्यक्ष के 'डिप्टी प्रेसिडेंट' रहने के दौरान (साल 2012 से 2015 के बीच) हुए फैसलों को मजदूर विरोधी बताते हुए तीखे सवाल पूछे हैं:
कमेटी मेंबरों ने अध्यक्ष के 'डिप्टी प्रेसिडेंट' रहने के दौरान (साल 2012 से 2015 के बीच) हुए फैसलों को मजदूर विरोधी बताते हुए तीखे सवाल पूछे हैं:
- सरप्लस और सस्पेंशन: साल 2014 में ट्यूब डिवीजन का 25% हिस्सा आउटसोर्स करके कर्मचारियों को सरप्लस पूल में क्यों डाला गया और 25 NS ग्रेड कर्मियों को क्यों सस्पेंड कराया गया?
- 7 साल का समझौता: 5 साल के ग्रेड रिवीजन समझौते को बढ़ाकर 7 साल का क्यों होने दिया गया?
- कैंटीन वेंडर सिस्टम: साल 2014 में कैंटीन को वेंडर के हाथों में क्यों सौंपा गया, जिसकी खराब गुणवत्ता से आज कर्मचारी परेशान हैं?
- कम बोनस: वर्ष 2015 में अब तक का सबसे कम 8.53% और 2016 में 8.6% बोनस समझौता क्यों किया गया? क्या आपने तब इसका विरोध किया था?
इस अंदरूनी खींचतान और भारी दबाव के बीच अब देखना यह है कि प्रबंधन और यूनियन कब तक कर्मचारियों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं।
आज फिर होगी टाटा स्टील कर्मियों की ग्रेड मीटिंग
टाटा स्टील के कर्मचारियों के वेज रिवीजन समझौता को लेकर गुरुवार को प्रबंधन और यूनियन के बीच वार्ता होगी। यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी बुधवार की रात तक दिल्ली से जमशेदपुर पहुंचेंगे।
दिल्ली में उनकी पत्नी का इलाज चल रहा है। इस संबंध में उन्होंने बताया कि शहर पहुंचने के बाद गुरुवार को वेज रिवीजन समझौता को लेकर वार्ता होगी।
फिर शुक्रवार को कमेटी मीटिंग बुलाई गई है। चुकी टॉप थ्री ने यह प्रतिबद्धता जतायी थी कि वेज रिवीजन समझौता से पहले कमेटी मीटिंग बुलाई जाएगी। इस मीटिंग में सदस्यों के समक्ष प्रबंधन के प्रस्तावों को बताया जायेगा और उनके सुझाव लिए जाएंगे।