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    ओडिशा में क्योंझर की पहाड़ियों से निकलेगा 314 मिलियन टन लोहा, Tata Steel के विस्तार को मिली नई रफ्तार

    Updated: Sun, 29 Mar 2026 11:05 PM (IST)

    टाटा स्टील को 2030 तक उत्पादन दोगुना करने के लक्ष्य में बड़ी सफलता मिली है। ओडिशा सरकार ने क्योंझर के गंधालपाड़ा लौह अयस्क ब्लॉक के लिए 216.875 हेक्टे ...और पढ़ें

    टाटा स्‍टील की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    टाटा स्‍टील की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    HighLights

    1. ओडिशा सरकार ने गंधालपाड़ा माइंस के लिए केंद्र से मांगी 216 हेक्टेयर वन भूमि।

    2. टाटा स्टील का लक्ष्य 2030 तक उत्पादन 40 मिलियन टन करना।

    3. ब्लॉक में 314 मिलियन टन लौह अयस्क का विशाल भंडार है।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील के वर्ष 2030 तक उत्पादन दोगुना करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। ओडिशा सरकार ने क्योंझर जिले में स्थित गंधालपाड़ा लौह अयस्क ब्लॉक के विकास के लिए 216.875 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने का औपचारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। 
     

    उत्पादन क्षमता 40 मिलियन टन करने का लक्ष्य 

    यह कदम टाटा स्टील के लिए कच्चे माल की भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Tata Steel ने वर्ष 2030 तक अपनी वार्षिक कच्चा इस्पात (Crude Steel) उत्पादन क्षमता को मौजूदा 19 मिलियन टन से बढ़ाकर 40 मिलियन टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 
    •     कच्चे माल की जरूरत: इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कंपनी को प्रतिवर्ष लगभग 66 मिलियन टन लौह अयस्क की आवश्यकता होगी। 
    •     वर्तमान स्थिति: अभी कंपनी अपनी जमशेदपुर, कलिंगनगर और मेरामंडली इकाइयों के लिए अपनी खदानों से लगभग 32 मिलियन टन अयस्क ही प्राप्त कर पा रही है।
    •     समाधान: गंधालपाड़ा ब्लॉक से उत्पादन शुरू होना बाहरी निर्भरता को कम करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।


    गंधालपाड़ा ब्लॉक: खजाने की तरह है यह खदान 

    क्योंझर वन मंडल के तहत आने वाले कुल 241.1 हेक्टेयर के इस लीज क्षेत्र में से लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा वन भूमि है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के आंकड़ों के अनुसार इस खदान में लगभग 314.37 मिलियन टन लौह अयस्क का भंडार होने का अनुमान है।

    यहां उपलब्ध अयस्क की औसत गुणवत्ता 60.5 प्रतिशत के आसपास है, जो इस्पात निर्माण के लिए व्यावसायिक रूप से अत्यंत लाभकारी है। टाटा स्टील ने 2021 की नीलामी में सफल बोली लगाकर 50 वर्षों के लिए इस ब्लॉक का आशय पत्र (LoI) प्राप्त किया है।

    पर्यावरण और वैधानिक मंजूरियां 

    राज्य सरकार ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजे प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि लौह अयस्क का भंडार प्राकृतिक रूप से वन क्षेत्र के नीचे स्थित है, इसलिए भूमि हस्तांतरण के बिना खनन संभव नहीं है। 
     
    राहत की बात यह है कि यह क्षेत्र किसी भी राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, एलीफेंट रिजर्व या टाइगर रिजर्व के दायरे में नहीं आता है। इसे भारतीय खान ब्यूरो और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पहले ही तकनीकी मंजूरियां मिल चुकी हैं। 
     

    स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा 

    लगभग 125 करोड़ रुपये की लागत वाली इस खदान परियोजना से न केवल टाटा स्टील बल्कि स्थानीय समुदाय को भी लाभ होगा:

    •     रोजगार: इससे करीब 100 लोगों को प्रत्यक्ष और 150 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। 
    •     पुनर्वास: खदान क्षेत्र में आने वाले 43 परिवारों के लिए कंपनी एक विस्तृत पुनर्वास योजना पर काम कर रही है।
    •     राजस्व: रॉयल्टी और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के माध्यम से राज्य के खजाने में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। 

    ओडिशा के वन एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव केएस प्रदीप ने केंद्र से इस प्रस्ताव को जल्द हरी झंडी देने का अनुरोध किया है ताकि विकास की प्रक्रिया में तेजी आ सके।