टाटा वर्कर्स यूनियन में ‘स्वजाति’ की राजनीति को लेकर मचा घमासान, 31 को कमेटी मीटिंग
टाटा वर्कर्स यूनियन में 'स्वजाति' के आधार पर लाभ पहुंचाने की राजनीति गरमा गई है, जिसकी शुरुआत कमेटी मेंबरों के ...और पढ़ें

टाटा वर्कर्स यूनियन मंच। जागरण
HighLights
कमेटी मेंबरों के वाट्सएप पोस्ट से विवाद शुरू हुआ।
'स्वजाति' के आधार पर लाभ पहुंचाने के आरोप लगे।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा वर्कर्स यूनियन में स्वजातियों को ‘हार‘ पहनाने की राजनीति कोई नई बात नहीं है, अब तक इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से कमेटी मेंबर से लेकर यूनियन सदस्य बचते रहे हैं। लेकिन अब यह मामला धीरे-धीरे खुलकर सामने आने लगा है।
कमेटी मेंबरों के वाट्सएप ग्रुप में शुक्रवार को हुई एक पोस्ट के बाद यूनियन की आंतरिक राजनीति में इसे लेकर घमासान तेज हो गया है। यूनियन में स्वजाति के नाम पर अलग-अलग तरीके से लामबंदी किए जाने की चर्चा लंबे समय से रही है।
आरोप है कि पिछले दिनों एक शीर्षस्थ पदाधिकारी ने अपने स्वजाति के कमेटी मेंबरों के साथ अलग से बैठक बुलाई थी जबकि कुछ प्रबंधन के स्तर पर अपने स्वजातीय लोगों को अलग से लाभ दिलाने की कोशिश करते हैं।
अब तक ऐसी गतिविधियां पर्दे के पीछे होती थीं, लेकिन वाट्सएप पोस्ट के बाद यह राजनीति खुलकर चर्चा में आ गई है जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि स्वजाति की यह आंच अब केवल कमेटी मेंबरों तक सीमित नहीं रह गई है। यूनियन के पदाधिकारियों के नाम भी चर्चा में आने लगे हैं।
इससे यूनियन के भीतर इस बात को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि नियम-कायदे सभी के लिए समान हैं या प्रभाव और स्वजातीय समीकरण के आधार पर अलग-अलग रास्ते बनाए जा रहे हैं।
दिसंबर 2026 में प्रस्तावित यूनियन चुनाव को देखते हुए यह मामला और संवेदनशील हो गया है। चुनावी माहौल बनने के साथ स्वजातीय गोलबंदी का असर यूनियन की राजनीति पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आईबीएमडी के कमेटी मेंबर का पोस्ट
पहले कमेटी मेंबरों को कहा जाता था कि वे किसी दूसरे के सेक्शन में जाकर उसके विरोधी को समर्थन देते है लेकिन अब तो यहां एक कदम आगे बढ़कर मेरे सेक्शन में मेरे विरोधी को उसके स्वजातीय आफिस बियरर्स ने शावक नानावटी टेक्निकल इंस्टीट्यूट में ईसीबीएस टेस्ट के दौरान आउट आफ द वे जाकर मदद पहुंचाई। जब मैंने उनसे मदद मांगी तो हमें नियम कायदा समझाया गया। मुझे क्या, हर किसी को समझाया जाता है कि ईसीबीएस टेस्ट बहुत नियमों से होता है।
वाह रे राजनीति, पहले लगा था कि यह खेल सिर्फ कमेटी मेंबरों तक सीमित है लेकिन अब तो आफिस बियरर्स भी इसमें खुलकर कूद पड़े हैं। शक तो पहले से था लेकिन अब तक यह सबकुछ खुल्लम-खुल्ला दिखाई देने लगा है।
टाटा वर्कर्स यूनियन की 31 को होगी कमेटी मीटिंग
लंबे इंतजार के बाद टाटा वर्कर्स यूनियन की 31 अगस्त को कमेटी मीटिंग होने जा रही है। इसमें यूनियन अपने चार माह के आय-व्यय का एकाउंट्स हाउस से पास कराएगी।
टाटा वर्कर्स यूनियन के संविधान के तहत प्रत्येक दो माह में कमेटी मीटिंग होना है। कमेटी मीटिंग से पहले फाइनांस कमेटी की बैठक होती है जिसमें कमेटी के सदस्य यूनियन के खर्चों की जांच करती है। इस बार फाइनांस कमेटी की बैठक 10 जुलाई को हुई लेकिन कमेटी मीटिंग नहीं हुई।
पहले ग्रेड रिवीजन के कारण कमेटी मेंबरों में उभरा असंतोष फिटमेंट स्लिप मिलने के बाद और बढ़ गया। ऐसे में कमेटी मेंबरों के बढ़ते असंतोष को देखते हुए यूनियन नेतृत्व ने भी कमेटी मीटिंग बुलाने से परहेज की लेकिन पिछले दिनों पदाधिकारियों की बैठक और ग्रेड रिवीजन में हुई विसंगतियों को दूर करने के लिए बनी प्रबंधन-यूनियन की साझा कमेटी ने थोड़ा राहत जरूर प्रदान की है।
ऐसे में यूनियन नेतृत्व 52 दिनों के बाद कमेटी मीटिंग बुला रही है। हालांकि इस कमेटी मीटिंग में अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी या नहीं, यह अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है।
