टाटानगर में ट्रेनों का 'टाइम टेबल' फेल: जनशताब्दी 14 घंटे तो साउथ बिहार 5 घंटे लेट
चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री परेशान हैं। रविवार को टाटानगर पहुंचने वाली 14 प्रमुख ट्रेनें डेढ़ से 15 घंटे तक देरी से चलीं। माल ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
चक्रधरपुर मंडल में ट्रेनें डेढ़ से 15 घंटे तक लेट।
मालगाड़ियों को प्राथमिकता से यात्री ट्रेनों में देरी।
डीआरएम के आश्वासन के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर । चक्रधरपुर रेल मंडल के अंतर्गत ट्रेनों की लेटलतीफी यात्रियों के लिए जी का जंजाल बन गई है। रविवार को एक बार फिर रेल व्यवस्था पूरी तरह चरमराई नजर आई, जहां टाटानगर पहुंचने वाली 14 प्रमुख ट्रेनें डेढ़ घंटे से लेकर 15 घंटे तक के विलंब से चलीं।
धरातल पर नाकाम साबित हो रहे आश्वासन
कौन सी ट्रेन कितनी हुई लेट?
रविवार को विलंब से चलने वाली ट्रेनों की सूची लंबी है, जिसने रेल परिचालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
- 12021 हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस: यह ट्रेन अपने निर्धारित समय से 14 घंटे 15 मिनट की भारी देरी से चली।
- 22844 बक्सर-टाटा-बिलासपुर एक्सप्रेस: सुबह 9:30 बजे आने वाली यह ट्रेन रात 9:20 बजे टाटानगर पहुंची।
- 13287 साउथ बिहार एक्सप्रेस: यह ट्रेन 5 घंटे 41 मिनट विलंब रही।
- 18478 कलिंग उत्कल एक्सप्रेस: लगभग 4.5 घंटे की देरी से पहुंची।
- 21896 पटना-टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस: प्रीमियम ट्रेन होने के बावजूद यह 27 मिनट की देरी से पहुंची।
- अन्य ट्रेनें: मुंबई मेल (5 घंटे 53 मिनट), समर स्पेशल (5 घंटे), ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस (3 घंटे 59 मिनट) और इतवारी-टाटा एक्सप्रेस (5 घंटे 45 मिनट) जैसी कई ट्रेनें घंटों लेट रहीं।
मालगाड़ियों का दबदबा, यात्री परेशान
यात्रियों का कहना है कि चक्रधरपुर मंडल में मालगाड़ियों के परिचालन को दी जा रही प्राथमिकता ने यात्री ट्रेनों की गति छीन ली है। लंबी दूरी की ट्रेनों के घंटों लेट होने के कारण स्टेशन पर बच्चों और बुजुर्गों के साथ सफर करने वाले लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
रेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
लगातार होती इस लेटलतीफी ने रेल प्रबंधन की कार्यक्षमता और यात्री सेवाओं के प्रति उनकी गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जहां एक ओर वंदे भारत जैसी हाईस्पीड ट्रेनों का प्रचार किया जा रहा है, वहीं सामान्य और एक्सप्रेस ट्रेनों की ऐसी स्थिति ने आम आदमी की यात्रा को कष्टदायक बना दिया है।