चाकुलिया में सुनसुनिया रेल फाटक के पास ट्रैक पर पहुंचे हाथी, चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोकी उत्कल एक्सप्रेस
पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस के चालक ने चाकुलिया-कोकपाड़ा के बीच ट्रैक पर हाथियों को देखकर ट्रेन रोकी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। लोको पायलट की सतर्कता ...और पढ़ें

कालियाम पंचायत के राजाबासा, गोदराशोल और सुनसुनिया जंगलों में हाथियों का समूह लगातार विचरण करता रहता है।
HighLights
लोको पायलट की सतर्कता से टला बड़ा रेल हादसा।
चाकुलिया-कोकपाड़ा के बीच ट्रैक पर आया हाथियों का झुंड।
स्पीड प्रतिबंध और सूझबूझ से बची सैकड़ों जानें।
संसू, चाकुलिया। पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस के चालक (लोको पायलट) की सतर्कता और सूझबूझ से बड़ा रेल हादसा टल गया। चाकुलिया एवं कोकपाड़ा स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर अचानक हाथियों का झुंड आने के कारण ट्रेन को समय रहते रोक लिया गया।
सुबह 5:26 बजे की घटना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 5:20 बजे उत्कल एक्सप्रेस चाकुलिया स्टेशन से रवाना हुई थी। सुबह लगभग 5:26 बजे जब ट्रेन चाकुलिया और कोकपाड़ा स्टेशन के बीच स्थित सुनसुनिया रेल फाटक के समीप पहुंची।
तब सुनसुनिया जंगल से निकलकर हाथियों का एक झुंड एरोड्रम की ओर जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। झुंड के कुछ हाथी ट्रैक पार कर चुके थे, जबकि तीन-चार हाथी पटरी पर ही खड़े थे।
दूर से ही हाथियों को देखकर लोको पायलट ने त्वरित सूझबूझ दिखाई। ट्रेन की गति पहले से ही नियंत्रित होने के कारण चालक ने तत्काल ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोक दिया।
करीब 3 मिनट तक ट्रेन वहीं खड़ी रही। सभी हाथियों के सुरक्षित रूप से दक्षिण दिशा की ओर निकल जाने के बाद ही ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया।
स्पीड रिस्ट्रिक्शन से मिली बड़ी राहत
चाकुलिया वन क्षेत्र हाथियों की आवाजाही के लिए जाना जाता है। कालियाम पंचायत के राजाबासा, गोदराशोल और सुनसुनिया जंगलों में हाथियों का समूह लगातार विचरण करता रहता है।
रेलवे प्रशासन ने इस क्षेत्र को हाथी-प्रभावित घोषित कर रखा है, जिसके तहत रात 8:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक ट्रेनों की अधिकतम गति सीमा 50 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
जान हथेली पर रखकर ड्यूटी करने को मजबूर रेलकर्मी
गति नियंत्रित होने के कारण ही लोको पायलट समय पर ब्रेक लगाने में सफल रहे। सुनसुनिया जंगल के अप एवं डाउन लाइन स्थित दोनों रेलवे फाटकों पर 24 घंटे गेटमैन तैनात रहते हैं।
घने जंगल और हाथियों के खतरे के बीच रात में ड्यूटी करने वाले रेलकर्मी बेहद भयभीत रहते हैं। एक गेटमैन ने आपबीती सुनाई।
उन्होंने बताया कि दो दिन पूर्व सोमवार की रात ड्यूटी पर जाते समय सड़क पर उसका सामना जंगली हाथियों से हो गया था, जहां उसने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।
इसके अलावा, हाथियों के हमले के डर से केबिन मैन अपने कमरों में पका हुआ भोजन या कच्चा अनाज (चावल आदि) भी नहीं रखते।
क्योंकि भोजन की गंध सूंघकर हाथी सीधे केबिन का रुख कर लेते हैं। लोको पायलट की सूझबूझ और रेलवे के सुरक्षा नियमों के सतर्कतापूर्वक पालन से इस बार एक बड़ी त्रासदी होने से बच गई।