जमशेदपुर के विश्वदीप का कमाल; AR Rahman की साइलेंट फिल्म 'GandhiTalks' को दी अपनी आवाज
जमशेदपुर के विश्वदीप जीस्त ने एआर रहमान की मूक फिल्म 'गांधी टॉक्स' के लिए गीत लिखकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनके लिखे तीन गीतों, जिनमें 'निं ...और पढ़ें

ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान के साथ जमशेदपुर वासी गीतकार विश्वदीप जीस्त।
HighLights
उनके गीतों ने मूक फिल्म की भावनाओं को सफलतापूर्वक व्यक्त किया।
पिता की प्रेरणा से 13 साल के संघर्ष के बाद मिली सफलता।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जब इरादे फौलादी हों, तो इस्पात नगरी की मिट्टी भी मायानगरी में अपनी खनक छोड़ देती है। जमशेदपुर के परसुडीह निवासी विश्वदीप जीस्त ने अपनी प्रतिभा के दम पर यह साबित कर दिखाया है।
ऑस्कर विजेता दिग्गज संगीतकार AR Rahman की नई फिल्म Gandhi Talks में विश्वदीप के लिखे गीतों ने न केवल फिल्म को जुबां दी है, बल्कि दुनिया भर के संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया है।
मूक फिल्म को शब्दों से मिली भावनाएं
Gandhi Talks एक साइलेंट (मूक) फिल्म है, जिसमें संवादों का अभाव है। ऐसे में कहानी की भावनाओं को दर्शकों तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी संगीत और गीतों पर थी।
विश्वदीप ने अपनी कलम से भावनाओं के उस शून्य को भरा है। फिल्म में उनके द्वारा लिखित लोरी निंदिया परी सहित कुल तीन गीतों को जगह मिली है।
Oscar विजेता रहमान के साथ काम करने के अनुभव पर विश्वदीप कहते हैं कि यह किसी सुंदर सपने के सच होने जैसा है।
करीम सिटी कॉलेज से रहमान के स्टूडियो तक का सफर
जमशेदपुर के Karim City College से अपनी शिक्षा पूरी करने वाले विश्वदीप का यह सफर आसान नहीं था। 13 वर्षों का अनवरत संघर्ष और बिना किसी गॉडफादर के मुंबई की गलियों में अपनी पहचान बनाना उनकी जिजीविषा को दर्शाता है।
इससे पहले उन्होंने खामोशी, वो भी दिन थे और दंगे जैसी फिल्मों में भी अपनी लेखनी का परिचय दिया है, लेकिन रहमान के साथ गांधी टॉक्स उनके करियर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई है।
एक पुरानी कसक ने बनाया गीतकार
विश्वदीप के गीतकार बनने के पीछे एक भावुक कहानी छिपी है। उनके पिता मनोज कांति सेन द्वारा लिखे एक गीत को जब महान गायिका लता मंगेशकर ने गाया, तो उन्हें उसका श्रेय नहीं मिला।
पिता की इसी टीस ने बेटे के हाथों में कलम थामने की प्रेरणा दी। आज जब रहमान जैसे दिग्गज उनकी लेखनी की सराहना करते हैं, तो यह न केवल उनके पिता के सम्मान की जीत है, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर निकलते हैं।