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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    चौंक गई पुलिस, 2.5 लाख लोगों को 8वीं-10वीं पास शातिरों ने ठगा, ChatGPT और Java प्रोग्रामिंग के एक्सपर्ट

    Updated: Tue, 28 Jan 2025 12:30 PM (GMT+05:30)

    जामताड़ा पुलिस ने छह साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने 2.5 लाख से अधिक लोगों को ठगा है। ये शातिर चैट जीपीटी और जावा प्रोग्रामिंग के एक्सपर्ट है ...और पढ़ें

    आठवीं पास शातिर चैट जीपीटी व जावा प्रोग्रामिंग के हैं एक्सपर्ट, ठगी के दौरान करते थे ड्रोन से निगरानी
    आठवीं पास शातिर चैट जीपीटी व जावा प्रोग्रामिंग के हैं एक्सपर्ट, ठगी के दौरान करते थे ड्रोन से निगरानी

    HighLights

    1. गिरफ्त में आए 8वीं-10वीं पास शातिर चैट जीपीटी और जावा प्रोग्राम के विशेषज्ञ
    2. साइबर अपराधी खुद बना रहे थे एपीके फाइल, ठगी के दौरान ड्रोन से निगरानी
    3. अपने गुर्गों को 25 से 30 हजार रुपये में एपीके फाइल बेचकर करवाते थे ठगी

    कौशल सिंह, जामताड़ा। जामताड़ा पुलिस के हत्थे चढ़े छह शातिर साइबर ठगों से जो साक्ष्य मिले हैं, वह आम लोगों के लिए तो चौंकाने वाले हैं ही, पुलिस महकमे के लिए नई चुनौतयों से भरे हैं।

    मास्टरमाइंड महबूब आलम उर्फ डीके बोस, आरिफ अंसारी उर्फ डीके और शेख बेलाल उर्फ डीके बोस आठवीं से दसवीं पास हैं, लेकिन ये शातिर चैट जीपीटी और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा जावा समेत तकनीकी रूप से इतने दक्ष हैं कि खुद ही कई तरह की एपीके एप बना रहे थे।

    इनकी मदद से अबतक ढाई लाख से भी ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। इन शातिरों ने पुलिस से बचने के लिए जो तरीका अपनाया, वह और भी नायाब है।

    विश्वस्त पुलिस सूत्रों के अनुसार जिस दौरान ये साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देते थे, उस दौरान ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल करते थे ताकि पुलिस के आने की भनक दूर से ही मिलती रहे।

    शातिरों ने पीएम किसान योजना एपीके, पीएम फसल बीमा योजना एपीके, कई बैंकों के एपीके व एनपीसीआइ इंटरनेशनल के नाम से फर्जी मोबाइल एपीके बनाकर हजारों लोगों के खातों में सेंधमारी की।

    इनके मोबाइल से 100 से अधिक फर्जी मोबाइल एपीके फाइल बरामद हो चुकी हैं। इस गिरोह के पास से एक फर्जी केंद्रीकृत पैनल मिला, जिससे हजारों लोगों के एसएमएस को ये आसानी से देख सकते थे।

    इनमें वाट्सएप ओटीपी, फोन-पे लाग-इन ओटीपी, बैंकिंग लेनदेन आदि शामिल हैं। शातिरों द्वारा बनाई गई वेबसाइट भी उनके मोबाइल से बरामद हुई।

    ये अपराधी एंड्रायड साफ्टवेयर डेवलपमेंट के विशेषज्ञ हैं और साइबर ठगी के लिए चैट जीपीटी का इस्तेमाल करते थे।

    पुलिस की गिरफ्त में शातिर अपराधी।

    भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र व गृह मंत्रालय से मांगी मदद

    तकनीकी रूप से दक्ष इन शातिरों का दायरा कितना व्यापक है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चैट जीपीटी और आर्टिफिशियल इंटीलेंस के विशेषज्ञ इन शातिरों के बारे में गहन पड़ताल के लिए पुलिस को कई तरह की मदद मांगनी पड़ रही।

    पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और गृह मंत्रालय से मदद मांगी है ताकि इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंच कर पड़ताल पूरी की जा सके।

    आइ-फोर सी के समन्वय पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तार अपराधी देशभर में 415 से अधिक साइबर अपराध के मामलों से जुड़े हैं। इनमें करीब 11 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं।

    डीके बोस नाम से बना रखा था ग्रुप

    तीन शातिर डीके बोस छद्म नाम से काम कर रहे थे। इनके द्वारा बनाए गए फर्जी एपीके एप अन्य साइबर अपराधियों के बीच काफी लोकप्रिय थे। अपने सैकड़ों गुर्गों को एपीके एप 25-30 हजार रुपये में बेचते थे और धंधा करवाते थे। गिरफ्तार छह अपराधियों में से चार पहले भी साइबर ठगी के मामले में जेल जा चुके हैं। - एहतेशाम वकारिब, एसपी, जामताड़ा

    इस तरह जामताड़ा में दशकों से साइबर ठगी का कारोबार फल-फूल रहा है। लाख कार्रवाई होने के बाद भी साइबर ठगों के हौसले पस्त नहीं हो रहे हैं।

    ठगी के लिए ना काल की जरूरत, ना ओटीपी का सहारा

    जांच में जो बात सामने आई है, वह बेहद खतरनाक हैं। अपने एपीके एप के सहारे ना तो इन्हें किसी को काल करने की जरूरत पड़ती थी, ना ही ओटीपी मांगने की।

    जो भी व्यक्ति इनके एप को अपने मोबाइल पर गलती या धोखे से अपलोड कर लेता था, उनके सारे विवरण साइबर ठग अपने घर बैठे ही देख लेते थे। ऐसे में लोगों को इस बात का तनिक भी अंदेशा नहीं होता था कि वे ठगी का शिकार हो रहे हैं।

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