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    60 की उम्र पार, नाती-पोतों वाले दंपती ने लिया तलाक... जामताड़ा फैमिली कोर्ट की समझाइश भी नहीं आई काम

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 07:05 AM (IST)

    जामताड़ा में 60 वर्ष से अधिक उम्र के एक बुजुर्ग दंपती ने दशकों पुराने वैवाहिक रिश्ते को आपसी सहमति से समाप्त कर दिया। ...और पढ़ें

    पति अर्जुन और पत्नी सोना। (फोटो साैजन्य)

    पति अर्जुन और पत्नी सोना। (फोटो साैजन्य)

    संवाद सहयोगी, करमाटांड़ (जामताड़ा)। शादी को सात जन्मों का अटूट बंधन माना जाता है और जीवन के अंतिम पड़ाव में पति-पत्नी एक-दूसरे का सबसे बड़ा सहारा होते हैं। लेकिन जामताड़ा जिले से सामने आए एक अनोखे मामले ने इस पारंपरिक धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    करमाटांड़ थाना क्षेत्र के रहने वाले 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग दंपती अर्जुन और सोना ने दशकों पुराने वैवाहिक रिश्ते को आपसी सहमति से समाप्त कर दिया। दोनों के बालिग बेटे-बेटी हैं और परिवार में नाती-पोते भी हैं, लेकिन वर्षों से चले आ रहे मनमुटाव के कारण उन्होंने अलग होने का फैसला लिया।

    दोनों ने जामताड़ा व्यवहार न्यायालय के फैमिली कोर्ट में हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश राजेश कुमार ने दंपती को समझाने और मेडिएशन के माध्यम से रिश्ता बचाने का प्रयास किया।

    अदालत की कोशिश थी कि जीवन के इस पड़ाव पर परिवार बिखरने से बच जाए, लेकिन दोनों अपने निर्णय पर अडिग रहे। सुलह के सभी प्रयास विफल होने के बाद न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए वैवाहिक संबंध विच्छेद की अनुमति दे दी। अदालत परिसर में फैसले के बाद का दृश्य भावुक करने वाला था।

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    वर्षों तक साथ निभाने वाले दोनों जीवनसाथी बिना किसी विवाद या कटुता के अलग-अलग रास्तों पर निकल पड़े। यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। पति अर्जुन का कहना है कि उनकी पत्नी लंबे समय से मायके में रह रही थीं। कई बार साथ रहने का आग्रह करने के बावजूद वह वापस नहीं आईं। वहीं पत्नी सोमा का आरोप है कि पति अक्सर झगड़ा करते थे और कोई नियमित काम-धंधा भी नहीं करते थे। इसी कारण उन्होंने मायके में रहना ही उचित समझा।

    दंपती के अधिवक्ता चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि दोनों ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की थी। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने और निर्धारित अवधि के बाद अदालत ने तलाक की अनुमति प्रदान कर दी। दंपती के दो पुत्र और एक पुत्री हैं तथा परिवार में नाती-पोते भी हैं।