जामताड़ा सदर अस्पताल में अब होगा पेपरलेस कामकाज, सभी सेवाएं होंगी डिजिटल
जामताड़ा सदर अस्पताल को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में बैठक हुई। अब अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी और मरीजों के रिकॉर्ड सहित सभी कार्य ऑनलाइन ...और पढ़ें
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जामताड़ा सदर अस्पताल

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संवाद सहयोगी, जामताड़ा। सदर अस्पताल जामताड़ा को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में बुधवार को बैठक हुई। बैठक सिविल सर्जन डा. शिव प्रसाद मिश्रा की अध्यक्षता में सदर अस्पताल अंतर्गत उपाधीक्षक कार्यालय प्रकोष्ठ में हुई, जिसमें सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक, चिकित्सा पदाधिकारी विभिन्न शाखा के प्रभारी व अस्पताल कर्मी शामिल हुए। बैठक में हास्पिटल आपरेटर, यूनिट इंचार्ज, एक्स-रे इंचार्ज, फार्मेसी इंचार्ज, लैब इंचार्ज सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस दौरान सिविल सर्जन ने सभी विभागों को निर्देश देते हुए कहा कि अब अस्पताल में अधिकतर कार्य डिजिटल माध्यम से किए जाएंगे और धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था को आनलाइन प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
बैठक में बताया गया कि ई-हास्पिटल व्यवस्था के अंतर्गत ओपीडी सेवा को आई-प्रिपरेशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा। साथ ही एक एप्लीकेशन विकसित की जाएगी, जिसके माध्यम से चिकित्सक मरीजों के इलाज और परामर्श की प्रविष्टि आनलाइन करेंगे। इससे मरीजों के इलाज से संबंधित सभी रिकार्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे और कार्यों में पारदर्शिता आएगी।
सिविल सर्जन ने कहा कि अब अस्पताल में सभी कार्य ऑनलाइन माध्यम से करने को प्राथमिकता दी जाएगी। ई-हास्पिटल के अंतर्गत लागू किए जा रहे सॉफ्टवेयर के माध्यम से सभी यूनिट और विभागों के माड्यूल को एक्टिवेट किया जाएगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रथम चरण में ओपीडी रजिस्ट्रेशन, चिकित्सकों द्वारा ओपीडी प्रविष्टि, आईपीडी के अंतर्गत मरीजों का एडमिशन, डिस्चार्ज एवं डिस्चार्ज नोट की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा।
इसके तहत ऑफलाइन कागजी प्रक्रिया की जगह पेपरलेस व्यवस्था लागू की जाएगी। अस्पताल प्रबंधक को निर्देश दिया गया कि सभी विभागों में माड्यूल एक्टिवेट करने के लिए संबंधित कर्मियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सिविल सर्जन स्तर से आदेश जारी किया जाए।
साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि अब अस्पताल में कागजी कार्य के स्थान पर डिजिटल और पेपरलेस कार्य प्रणाली को प्राथमिकता मिले। बैठक में डीसी एवं आभा आपरेटरों को निर्देश दिया गया कि शत-प्रतिशत मरीजों का पंजीकरण स्कैन एंड शेयर आभा आईडी के माध्यम से किया जाए।
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जिन मरीजों के पास आभा आईडी नहीं है, उनका तत्काल आभा आईडी जनरेट करने का निर्देश भी दिया गया। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से मरीजों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, वहीं रिकॉर्ड प्रबंधन और इलाज प्रक्रिया में भी पारदर्शिता एवं सुविधा बढ़ेगी।