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    नाला में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष ने बांटे वाद्ययंत्र, बोले, मांदर-झाल की ध्वनि वायु प्रदूषण घटाने में मददगार

    By Jagnath Bauri Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Thu, 30 Apr 2026 08:23 PM (IST)

    Jharkhand Speaker: नाला में विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने आदिवासी कला केंद्र में वाद्ययंत्र वितरित किए, संस्कृति संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने ...और पढ़ें

    वाद्ययंत्र वितरण करते झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो। (फोटो जागरण)

    वाद्ययंत्र वितरण करते झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो। (फोटो जागरण)

    HighLights

    1. विधानसभा अध्यक्ष ने नाला में वाद्ययंत्र वितरण किया।

    2. आदिवासी संस्कृति, परंपरा बचाने पर जोर दिया गया।

    3. मांदर, झाल ध्वनि वायु प्रदूषण कम करने में सहायक।

    संवाद सहयोगी, जागरण, नाला (जामताड़ा)। आदिवासी संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए झारखंड सरकार प्रतिबद्ध है। पुरानी परंपराओं और सभ्यता को बचाए रखने के लिए समाज के सभी लोगों को सजग होकर पहल करने की आवश्यकता है। आदिवासी समाज की परंपरा और संस्कृति प्रकृति से जुड़ी हुई है, जिसे किसी भी हाल में भूलना नहीं चाहिए।

    ये बातें गुरुवार को नाला प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित आदिवासी कला केंद्र (धुमकुड़िया केंद्र) में आयोजित वाद्ययंत्र वितरण समारोह के दौरान विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कही। उन्होंने विभिन्न वाद्ययंत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इनमें वैज्ञानिक विशेषताएं भी निहित हैं। मांदर और झाल की ध्वनि वायु प्रदूषण से बचाव में सहायक होती है, वहीं ढोल और नगाड़ा बजाने से उत्पन्न तेज ध्वनि लोगों के मनोबल को बढ़ाती है।

    उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का सबसे बड़ा पर्व सोहराय है, जिसे आज भी मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य के साथ बड़े उत्साह से मनाया जाता है। सोहराय पर्व के दौरान चारों ओर नई उमंग और उम्मीदों का संचार होता है। इस परंपरा को बनाए रखने के लिए झारखंड सरकार ने सोहराय पर्व पर अवकाश की घोषणा की है।

    उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर धुमकुड़िया केंद्रों का संचालन किया जा रहा है, ताकि समाज के लोग—माता-बहन, भाई तथा मांझी, हड़ाम, नायकी जैसे पारंपरिक पदाधिकारी—एक स्थान पर एकत्र होकर अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर विचार-विमर्श कर सकें। साथ ही भाषा, संस्कृति और आचार-विचार पर गहन चिंतन कर आगे बढ़ सकें।

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    इस अवसर पर उपायुक्त आलोक कुमार ने भी आदिवासी समाज की सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने पर जोर दिया। कार्यक्रम में एसपी शंभूनाथ सिंह, एसडीपीओ मनोज कुमार महतो, बीडीओ आकांक्षा कुमारी, प्रमुख कलावती मुर्मू, उपप्रमुख समर माजी, सीडीपीओ ग्लोरी एक्का, झामुमो के जिला सचिव परेश यादव, प्रखंड अध्यक्ष उज्ज्वल भट्टाचार्य, विधायक प्रतिनिधि बासुदेव हांसदा सहित प्रखंड के 23 पंचायतों के मुखिया, पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान उपस्थित थे।

    इन पंचायतों को दिए गए वाद्ययंत्र

    कार्यक्रम के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों को मांदर, ढोल, नगाड़ा, हारमोनियम और झाल जैसे वाद्ययंत्र वितरित किए गए। इनमें नाला पंचायत के मुखिया अजित टुडू, दलाबड़ की मुखिया साबिका सोरेन, कास्ता के मुखिया मिनीश्वर मुर्मू, अफजलपुर के प्रेमो कोड़ा, धोबना की सावित्री किस्कू, फुटबेड़िया के महेश्वर हांसदा, पैकबड़ की आरती हेम्ब्रम सहित कुल 23 पंचायतों के मुखियाओं को एक-एक सेट वाद्ययंत्र प्रदान किया गया।

    वाद्ययंत्र वितरण से जनप्रतिनिधियों में खुशी देखी गई। यह वितरण कल्याण विभाग की ओर से किया गया। इस अवसर पर आईटीडीए के निदेशक जुगनू मींज और प्रखंड कल्याण पदाधिकारी भी मौजूद थे।